असम में यूसीसी की एंट्री, बहुविवाह पर रोक से लेकर लिव-इन रजिस्ट्रेशन तक कई बड़े बदलाव

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असम की हिमंता  बिस्वा सरमा सरकार ने राज्य विधानसभा में आधिकारिक तौर पर समान नागरिक संहिता यानी यूसीसी विधेयक पेश कर दिया है। कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद सरकार ने अपने दूसरे कार्यकाल के पहले विशेष सत्र में इस बहुप्रतीक्षित कानून को सदन में रखा।

इस कदम के साथ असम, उत्तराखंड  और गुजरात  के बाद नागरिक कानूनों में एकरूपता लागू करने की दिशा में आगे बढ़ने वाला तीसरा भाजपा शासित राज्य बन गया है।

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हालांकि, विपक्षी दलों ने विधानसभा में यूसीसी विधेयक पेश किए जाने का विरोध किया। विपक्ष का कहना है कि इतने बड़े सामाजिक और कानूनी बदलाव वाले कानून को लागू करने से पहले सभी हितधारकों के साथ व्यापक चर्चा होनी चाहिए थी।

राज्य सरकार के अनुसार, इस विधेयक का मसौदा असम की सामाजिक संरचना, सांस्कृतिक विविधता और जनसांख्यिकीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। यह कानून नागरिक जीवन से जुड़े पांच बड़े मुद्दों को नियंत्रित करेगा।

यूसीसी विधेयक की प्रमुख बातें

  • महिलाओं को बराबरी का अधिकार
    पैतृक संपत्ति और उत्तराधिकार में बेटियों को पुरुषों के समान अधिकार दिए जाएंगे।
  • बहुविवाह पर पूरी रोक
    राज्य में बहुविवाह की प्रथा को पूरी तरह अवैध घोषित किया जाएगा।
  • विवाह की समान न्यूनतम उम्र
    सभी समुदायों के लिए शादी की न्यूनतम कानूनी उम्र का एक समान मानक लागू होगा।
  • शादी और तलाक का अनिवार्य पंजीकरण
    सभी विवाह और तलाक को सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज कराना जरूरी होगा।
  • लिव-इन रिलेशनशिप पर सख्त नियम
    बिना शादी साथ रहने वाले जोड़ों के लिए पंजीकरण और कानूनी नियम अनिवार्य किए जाएंगे।

Abhilash Shukla (Editor)
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