UP Politics में बड़ा धमाका! क्या टूटने वाली है समाजवादी पार्टी? 25 सांसदों के बगावत के दावे से मचा सियासी भूचाल

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उत्तर प्रदेश की राजनीति में इन दिनों एक बड़ा सवाल चर्चा के केंद्र में है—क्या समाजवादी पार्टी (SP) में जल्द बड़ी टूट होने वाली है? भाजपा और उसके सहयोगी दलों के नेताओं के लगातार दावों ने सियासी गलियारों में हलचल तेज कर दी है। पहले ओम प्रकाश राजभर और अब डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के बयान ने इस चर्चा को और हवा दे दी है।

डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने दावा किया है कि समाजवादी पार्टी के 25 से 27 सांसद पार्टी छोड़ने की तैयारी में हैं। उन्होंने कहा, “हम किसी को तोड़ नहीं रहे हैं, लेकिन 2027 आते-आते सपा के सांसद खुद ही पार्टी छोड़ देंगे।” इतना ही नहीं, उन्होंने यह भी कहा कि 2027 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी का हाल पश्चिम बंगाल में टीएमसी से भी बुरा होगा।

केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम में मीडिया से बातचीत करते हुए मौर्य ने कहा कि चाहे सपा, बसपा और कांग्रेस मिलकर चुनाव लड़ें या अलग-अलग, भाजपा रिकॉर्ड जीत हासिल करेगी। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि “अखिलेश यादव की साइकिल सैफई तक तो जा सकती है, लेकिन सत्ता के गलियारों तक नहीं पहुंच पाएगी।”

उधर, यूपी सरकार में मंत्री ओम प्रकाश राजभर भी लगातार समाजवादी पार्टी पर हमलावर हैं। उन्होंने दावा किया कि सपा के भीतर असंतोष बढ़ रहा है और रामगोपाल यादव के नाम का जिक्र करते हुए पार्टी में अंदरूनी खींचतान की ओर इशारा किया। राजभर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कई तीखे बयान देते हुए यहां तक कह दिया कि “सपा की लंका में आग लगने वाली है” और पार्टी के भीतर ही “विभीषण” मौजूद है।

राजभर ने अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्होंने केवल इतना कहा था कि एसी कमरों से बाहर निकलकर जमीन पर राजनीति कीजिए, लेकिन इसी बात पर गठबंधन टूट गया। उन्होंने तंज कसते हुए यहां तक सुझाव दे दिया कि “अगर हालात ऐसे ही रहे तो समाजवादी पार्टी का विलय सुभासपा में कर लेना चाहिए।

इन बयानों के बीच सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी इन दावों को खारिज करते हुए भाजपा नेताओं पर अफवाह फैलाने का आरोप लगाया है। हालांकि लगातार सामने आ रहे बयानों ने यूपी की राजनीति में नई अटकलों को जन्म दे दिया है।

 क्या सचमुच समाजवादी पार्टी में अंदरूनी बगावत की आहट है, या यह 2027 विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा और सहयोगी दलों की राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है? क्या अखिलेश यादव पार्टी को एकजुट रख पाएंगे? अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं।

Abhilash Shukla (Editor)
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Abhilash Shukla is an experienced editor with over 28 years in journalism. He is known for delivering balanced, impactful, and credible news coverage.

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