तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद अभिषेक बनर्जी को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। बहुचर्चित मानहानि मामले में कोर्ट ने उनके खिलाफ जारी गिरफ्तारी वारंट पर लगी अंतरिम रोक हटा दी है, जिससे राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है।
बुधवार को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की एकल पीठ ने अभिषेक बनर्जी की याचिका खारिज करते हुए नवंबर 2025 में जारी गिरफ्तारी वारंट पर लगी रोक समाप्त कर दी। यह वारंट भोपाल की विशेष एमपी-एमएलए अदालत द्वारा जारी किया गया था।
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पूरा मामला 2020 के एक राजनीतिक बयान से जुड़ा है। बीजेपी नेता और मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के बेटे तथा इंदौर के पूर्व विधायक आकाश विजयवर्गीय ने 2021 में अभिषेक बनर्जी के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया था। आरोप है कि नवंबर 2020 में कोलकाता की एक रैली के दौरान अभिषेक बनर्जी ने आकाश विजयवर्गीय को “गुंडा” कहा था।
मामले की सुनवाई के दौरान एमपी-एमएलए अदालत ने अभिषेक बनर्जी के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया था। इसके बाद टीएमसी नेता ने हाई कोर्ट का रुख किया और दलील दी कि वह एक निर्वाचित सांसद हैं तथा उनके फरार होने की कोई संभावना नहीं है। इसी आधार पर नवंबर 2025 में वारंट पर अंतरिम रोक लगाई गई थी।
लेकिन अब हाई कोर्ट द्वारा यह राहत वापस लिए जाने के बाद सवाल उठने लगे हैं कि क्या अभिषेक बनर्जी को अदालत के समक्ष पेश होना पड़ेगा? क्या यह मामला आने वाले दिनों में और बड़ा राजनीतिक विवाद बन सकता है?
आपकी क्या राय है? क्या नेताओं द्वारा सार्वजनिक मंचों से दिए गए बयानों पर सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए, या इसे राजनीतिक अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हिस्सा माना जाना चाहिए? कमेंट करके अपनी राय जरूर बताएं।



