Bengal Political Storm: रात 3 बजे अभिषेक बनर्जी के घर रेड! ताला तोड़कर घुसी पुलिस? ममता बनर्जी भी तुरंत पहुंचीं
पश्चिम बंगाल की राजनीति में शनिवार तड़के बड़ा भूचाल आ गया, जब तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के कालीघाट स्थित आवास पर पुलिस और केंद्रीय बलों की संयुक्त टीम ने छापेमारी की। सुबह करीब 3 बजे हुई इस कार्रवाई ने राज्य की सियासत में जबरदस्त हलचल पैदा कर दी है।
👉 यह भी पढ़ें:
- Abhishek Banerjee को बड़ा झटका! MP High Court ने हटाई Arrest Warrant पर रोक, क्या अब बढ़ेंगी TMC नेता की मुश्किलें?
- टीएमएसी के बंटवारे पर अभिषेक बनर्जी भी रखेंगे अपना पक्ष, स्पीकर ओम बिरला ने 19 जून को बुलाया
- TMC में चल रही उठापटक के बीच पहली बार बोले अभिषेक बनर्जी, कल्याण बनर्जी को लेकर कह दी बड़ी बात
- ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक पर भड़के सांसद कल्याण बनर्जी, कहा-अभी भी पहले जैसा अहंकार
- Abhishek Banerjee Attack Row: ‘जो हुआ, गलत हुआ लेकिन जिम्मेदार कौन?’ मंत्री अग्निमित्रा पॉल के बयान से बंगाल की राजनीति में नया बवाल
- Abhishek Banerjee Attack Case: हमले के बाद बड़ा एक्शन! 5 आरोपी गिरफ्तार, बंगाल की राजनीति में मचा तूफान
रिपोर्ट्स के मुताबिक, पश्चिम मेदिनीपुर के शालबनी थाने की पुलिस, एक डीएसपी के नेतृत्व में, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) के जवानों के साथ अभिषेक बनर्जी के घर पहुंची। पुलिस टीम उनके कार्यकारी सहायक सुमित रॉय की तलाश में थी, जिन्हें एक मामले में फरार बताया जा रहा है।
बताया जा रहा है कि पुलिस ने पहले कई बार दरवाजा खटखटाया, लेकिन जवाब नहीं मिलने पर करीब दो घंटे तक इंतजार किया। इसके बाद राज्य आपदा प्रबंधन विभाग की मदद से मुख्य गेट का ताला तोड़कर टीम घर के अंदर दाखिल हुई। टीएमसी ने आरोप लगाया है कि पुलिस ने जबरन घर में घुसकर तलाशी ली।
छापेमारी की खबर मिलते ही टीएमसी प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी तुरंत मौके पर पहुंच गईं। कार्रवाई कई घंटों तक चली और सुबह तक पुलिस एवं सुरक्षा बलों की मौजूदगी बनी रही। घर से बाहर आने के बाद अभिषेक बनर्जी ने आरोप लगाया कि पुलिस ने पूरे घर की तलाशी ली और यह कार्रवाई राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश है।
यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है जब अभिषेक बनर्जी पहले से ही कई जांच एजेंसियों के रडार पर हैं। हाल ही में पश्चिम बंगाल सीआईडी ने विधानसभा से जुड़े कथित फर्जी हस्ताक्षर मामले में उनसे करीब छह घंटे तक पूछताछ की थी। अब उन्हें लगातार तीन दिनों तक अलग-अलग मामलों में जांच एजेंसियों के सामने पेश होना है।
14 जून: कथित फर्जी हस्ताक्षर मामले में सीआईडी पूछताछ
15 जून: शिक्षक भर्ती घोटाला (School Recruitment Scam) मामले में ईडी के समक्ष पेशी
16 जून: अमित शाह को कथित धमकी और हिंसा भड़काने के आरोपों से जुड़े मामले में सीआईडी पूछताछ
इस पूरी कार्रवाई ने बंगाल की राजनीति में नए सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या यह कानून के तहत सामान्य जांच है या फिर राजनीतिक दबाव की रणनीति? आने वाले दिनों में यह मामला और गर्माने की संभावना है।
आपकी क्या राय है? क्या अभिषेक बनर्जी के घर हुई यह कार्रवाई पूरी तरह कानूनी जांच का हिस्सा है, या इसके पीछे राजनीतिक मकसद छिपा हो सकता है? अपनी राय कमेंट में जरूर साझा करें।



