मुंबई। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को कथित तौर पर असंसदीय भाषा के इस्तेमाल को लेकर लोकसभा सचिवालय से नोटिस मिलने के बाद सियासी घमासान तेज हो गया है। शिवसेना यूबीटी के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने राहुल गांधी का बचाव करते हुए केंद्र सरकार और सत्तापक्ष पर तीखा हमला बोला। राउत ने सवाल उठाया कि किसी को ‘इडियट’ कहना आखिर कब से असंसदीय हो गया।
राहुल गांधी को क्यों मिला नोटिस?
मामला संसद में हुई एक बहस के दौरान राहुल गांधी की कथित टिप्पणी से जुड़ा है। रिपोर्टों के मुताबिक, राहुल गांधी ने एक छात्र के हवाले से ‘इडियट’ और ‘अंधभक्त’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया था। सत्तापक्ष के सांसदों ने इस पर आपत्ति जताते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के समक्ष शिकायत की। इसके बाद लोकसभा की संबंधित समिति की ओर से राहुल गांधी को नोटिस जारी कर उनसे जवाब मांगा गया है। रिपोर्ट के अनुसार राहुल गांधी को 28 अगस्त 2026 तक अपना जवाब दाखिल करने को कहा गया है।
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राउत ने उठाया ‘इडियट’ शब्द पर सवाल
राहुल गांधी को नोटिस दिए जाने पर संजय राउत ने सवाल किया कि ‘इडियट’ शब्द को असंसदीय कैसे माना जा सकता है। उन्होंने कहा कि अगर किसी व्यक्ति के आचरण पर सवाल उठाने के लिए ‘इडियट’ शब्द का इस्तेमाल किया गया है तो सिर्फ इस शब्द के आधार पर नोटिस देना उचित नहीं है। राउत ने अपने बयान में केंद्र सरकार और गृह मंत्री अमित शाह पर भी तीखा हमला किया। उन्होंने कहा कि अगर कोई मंत्री संसद में नहीं आता और सवालों का जवाब नहीं देता, तो विपक्ष उसे क्या कहेगा। इसी क्रम में उन्होंने ‘इडियट’ शब्द का इस्तेमाल करते हुए सत्तापक्ष पर निशाना साधा।
3 इडियट्स फिल्म का भी किया जिक्र
अपने बयान को और धार देते हुए संजय राउत ने आमिर खान की चर्चित फिल्म ‘3 इडियट्स’ का भी जिक्र किया। उन्होंने सवाल किया कि अगर ‘इडियट’ शब्द ही असंसदीय है तो इस नाम वाली फिल्म को सेंसर बोर्ड ने कैसे मंजूरी दी और वह इतनी लोकप्रिय कैसे हुई। राउत ने यह तर्क देते हुए कहा कि सिर्फ किसी शब्द के अंग्रेजी शब्दकोश में मौजूद होने या उसके इस्तेमाल से उसे स्वतः असंसदीय नहीं माना जा सकता। हालांकि, संसद में किसी शब्द का इस्तेमाल केवल शब्द के आधार पर नहीं, बल्कि उसके संदर्भ और सदन के नियमों के तहत भी देखा जाता है।
राउत का सरकार पर तीखा हमला
संजय राउत यहीं नहीं रुके। उन्होंने केंद्र सरकार के खिलाफ भी कई तीखी टिप्पणियां कीं। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि वह राहुल गांधी के सवालों और आलोचनाओं का जवाब देने के बजाय उन्हें नोटिस भेज रही है। राउत ने कहा कि अगर राहुल गांधी को सच बोलने के लिए नोटिस दिया जा रहा है तो यह सरकार की ‘बेवकूफी’ है। उन्होंने महाराष्ट्र सरकार के कुछ BJP नेताओं पर भी निशाना साधते हुए उन्हें ‘इडियट’ कहकर हमला किया और सत्तारूढ़ व्यवस्था को ‘इडियट कैबिनेट’ तक बता दिया। राउत ने अपने बयान में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को भी निशाने पर लिया।
‘अंधभक्त’ शब्द पर भी विवाद
राहुल गांधी को मिले नोटिस का विवाद सिर्फ ‘इडियट’ शब्द तक सीमित नहीं है। रिपोर्टों के मुताबिक, संसद में राहुल गांधी ने ‘अंधभक्त’ शब्द का भी इस्तेमाल किया था, जिस पर सत्ता पक्ष ने आपत्ति जताई थी। विपक्ष का तर्क है कि संसद में सरकार की नीतियों और उसके समर्थकों की आलोचना विपक्ष का लोकतांत्रिक अधिकार है। वहीं सत्ता पक्ष का कहना है कि सदन में बहस के दौरान सांसदों को मर्यादित और संसदीय भाषा का इस्तेमाल करना चाहिए।
28 अगस्त तक राहुल गांधी को देना है जवाब
अब इस मामले में राहुल गांधी के जवाब पर नजर रहेगी। यदि संबंधित संसदीय समिति राहुल गांधी की सफाई से संतुष्ट नहीं होती है तो मामला आगे संसदीय प्रक्रिया के तहत बढ़ सकता है। फिलहाल नोटिस दिए जाने का अर्थ यह नहीं है कि राहुल गांधी को दोषी ठहरा दिया गया है। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर संसद में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बनाम संसदीय मर्यादा की बहस को सामने ला दिया है।



