20 विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग तक मार्च की रणनीति बनाई है। यह निर्णय 30 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में ‘इंडिया’ गठबंधन की बैठक में लिया गया। विपक्षी दलों ने मतदाता सूची के पुनरीक्षण और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर चिंता जताई है।
नई दिल्ली में ‘इंडिया’ गठबंधन की बैठक में 20 विपक्षी दल शामिल
30 सितंबर को कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में हुई बैठक में कुल 20 विपक्षी दल शामिल हुए। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, सोनिया गांधी, राहुल गांधी, ममता बनर्जी, उमर अब्दुल्ला, तेजस्वी यादव और सुप्रिया सुले जैसे प्रमुख नेता मौजूद थे। शिवसेना (यूबीटी) के उद्धव ठाकरे और झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने वर्चुअल माध्यम से भाग लिया।
👉 यह भी पढ़ें:
- मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के नाम से राष्ट्रपति को इस्तीफा पत्र फर्जी, चुनाव आयोग ने किया खंडन
- भाजपा ने विपक्ष की मांग पर दिया पलटवार, चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर सियासत गर्म
- चुनाव आयोग ने महाराष्ट्र वोटरों के नाम हटाने पर आपत्ति की समय-सीमा बढ़ाई
- चुनाव आयोग में विवाद: 2 आयुक्तों की सहमति बिना SIR फैसले पर याचिका
- सुधांशु त्रिवेदी बोले- राहुल गांधी की राजनीतिक समझ है बिल्कुल शून्य
- देश की राजनीति में भूचाल, राहुल गांधी ने संविधान पर किया बड़ा बयान
हालांकि, आम आदमी पार्टी और द्रविड़ मुनेत्र कझगम ने इस बैठक से दूरी बनाए रखी, जबकि समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव व्यक्तिगत रूप से उपस्थित नहीं हुए।

मतदाता सूची पुनरीक्षण और चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप
बैठक का मुख्य मुद्दा मतदाता सूची के ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (SIR) में विसंगतियां और चुनाव आयोग की कार्यशैली थी। विपक्ष ने “वोट चोरी” के आरोप लगाए और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। यह मामला लोकतंत्र की विश्वसनीयता से जुड़ा हुआ है।
पार्टी नेताओं ने कहा कि यदि चुनाव प्रणाली में पारदर्शिता नहीं आई तो लोकतंत्र पर गंभीर संकट आ सकता है। इसलिए इस मुद्दे पर साझा रणनीति बनाना आवश्यक था।
2 से 8 अक्टूबर तक जिला स्तर पर ‘लोकतंत्र बचाओ’ मार्च
मल्लिकार्जुन खरगे ने घोषणा की कि 2 अक्टूबर से 8 अक्टूबर 2026 तक देश के हर जिले में ‘लोकतंत्र बचाओ’ अभियान चलाया जाएगा। इस दौरान जिला मजिस्ट्रेट कार्यालयों के सामने विरोध प्रदर्शन होंगे। यह कदम लोकतंत्र के प्रति बढ़ती चुनौतियों के खिलाफ जागरूकता बढ़ाने के लिए उठाया गया है।
यह आंदोलन गांधी जयंती से शुरू होकर आठ दिनों तक चलेगा, जिससे जनता में लोकतंत्र की रक्षा के लिए एकजुटता का संदेश जाएगा।

6 अक्टूबर को नई दिल्ली में चुनाव आयोग तक विरोध मार्च
‘इंडिया’ गठबंधन के सभी विपक्षी सांसद 6 अक्टूबर 2026 को चुनाव आयोग कार्यालय तक संयुक्त विरोध मार्च निकालेंगे। यह मार्च चुनाव आयोग की निष्पक्षता और स्वतंत्रता पर उठ रहे सवालों के मद्देनजर अहम माना जा रहा है।
मार्च के द्वारा विपक्ष अपनी मांगों को केंद्र सरकार और चुनाव आयोग तक पहुंचाना चाहता है। यह कदम चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा इशारा होगा।
राष्ट्रपति से मुलाकात कर संवैधानिक मुद्दे उठाने की योजना
अक्टूबर के दूसरे सप्ताह में विपक्षी नेता राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात करेंगे। इस दौरान वे संवैधानिक संस्थाओं पर कथित नियंत्रण और “वोट चोरी” के मुद्दे उठाएंगे। यह कदम संवैधानिक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए आवश्यक समझा जा रहा है।
राष्ट्रपति से संवाद के माध्यम से विपक्ष संवैधानिक सुरक्षा और लोकतंत्र की रक्षा की मांग करेगा। इससे राजनीतिक दबाव में इजाफा हो सकता है।
पांच बड़े संयुक्त रैलियों और बैलेट पेपर की मांग
गठबंधन ने अक्टूबर और नवंबर में देशभर में पांच बड़ी संयुक्त रैलियां आयोजित करने की योजना बनाई है। इन रैलियों का उद्देश्य लोकतंत्र बचाने के लिए एकजुटता दिखाना होगा।
साथ ही विपक्ष ने आगामी चुनावों में ईवीएम के बजाय मतपत्रों के इस्तेमाल की मांग की है। उनका मानना है कि बैलेट पेपर से चुनाव प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय होगी।



