30 सितंबर 2026 को भारतीय शेयर बाजार में मेटल-फार्मा स्टॉक्स के दबाव से सेंसेक्स 48 अंक गिरकर 72,480.29 पर बंद हुआ। निफ्टी भी 95.75 अंकों की गिरावट के साथ 22,620.45 के स्तर पर बंद हुआ। इस दौरान बाजार में शुरुआती बढ़त के बाद तेजी से बिकवाली देखी गई।
मेटल-फार्मा स्टॉक्स के दबाव से बाजार में गिरावट
मेटल-फार्मा स्टॉक्स में भारी बिकवाली के कारण आज बाजार में दबाव रहा। सन फार्मा, अडानी पोर्ट्स, टाइटन, बजाज फाइनेंस और इटरनल जैसे शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ाई। विदेशी निवेशकों (FIIs) द्वारा लगातार बिकवाली ने बाजार को कमजोर किया।
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सेंसेक्स और निफ्टी के आंकड़ों में गिरावट
बीएसई सेंसेक्स 48.78 अंक यानी लगभग 0.07% गिरकर 72,480.29 पर बंद हुआ। वहीं, एनएसई निफ्टी 50 सूचकांक 95.75 अंकों की गिरावट के साथ 22,620.45 पर बंद हुआ। पिछले पांच कारोबारी दिनों में बाजार में कुल मिलाकर करीब 3.5 फीसदी की गिरावट आ चुकी है। यह मेटल-फार्मा स्टॉक्स के दबाव का असर साफ दिखाता है।
मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में माइनर रिकवरी
हालांकि मुख्य सूचकांकों में गिरावट देखी गई, लेकिन मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में हल्की खरीदारी हुई। यह संकेत है कि कुछ निवेशक अभी भी मध्यम और छोटे आकार के शेयरों में अवसर तलाश रहे हैं। इस तरह के शेयरों में माइनर रिकवरी बाजार में संतुलन बनाए रखने में मदद कर रही है।

बढ़त वाले प्रमुख शेयरों में बैंकिंग और टेक सेक्टर शामिल
बाजार के दबाव के बावजूद कोटक महिंद्रा बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, इंडिगो, एक्सिस बैंक और टीसीएस के शेयरों में बढ़त देखी गई। ये शेयर बाजार के मजबूत स्तंभ बने हुए हैं और निवेशकों का भरोसा बनाए हुए हैं। बैंकिंग और टेक सेक्टर के ये शेयर बाजार की अस्थिरता में भी स्थिरता प्रदान करते हैं।
बाजार पर दबाव के पीछे क्या कारण हैं?
मेटल-फार्मा स्टॉक्स के दबाव के अलावा कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें निवेशकों के लिए चिंता का विषय बनी हुई हैं। इसके अलावा विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार बिकवाली ने बाजार को कमजोर किया है। ये कारण मिलकर बाजार में गिरावट के लिए जिम्मेदार हैं।
आगे क्या हो सकता है भारतीय शेयर बाजार में?
शेयर बाजार में यह गिरावट अल्पकालिक हो सकती है यदि मेटल और फार्मा सेक्टर में सुधार होता है। वहीं विदेशी निवेशकों की बिकवाली रुकती है तो बाजार में तेजी आ सकती है। निवेशकों को सतर्क रहना चाहिए और बाजार की चाल को ध्यान से समझना होगा।



