कोलकाता। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की सांसद महुआ मोइत्रा की मुश्किलें बढ़ गई हैं। पश्चिम बंगाल के नदिया जिले में कृष्णानगर की तृतीय न्यायिक मजिस्ट्रेट अदालत ने एक शिकायत मामले में उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। नदिया के पुलिस अधीक्षक अतुल वी. ने भी अदालत की ओर से वारंट जारी किए जाने की पुष्टि की है।
समन के बावजूद अदालत में पेश नहीं हुईं
मामला अदालत में लंबित एक शिकायत से जुड़ा है। रिपोर्टों के मुताबिक, इस मामले में अदालत की ओर से महुआ मोइत्रा को कई बार समन जारी किए गए थे। आरोप है कि निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के बावजूद वह अदालत के समक्ष पेश नहीं हुईं। अदालत ने लगातार गैरहाजिरी और समन का पालन नहीं किए जाने को गंभीरता से लिया। इसके बाद अदालत ने उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी करने का आदेश दिया। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, अदालत ने इस पूरे घटनाक्रम को समन की अनदेखी की एक लगातार श्रृंखला के रूप में देखा।
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धार्मिक भावनाएं आहत करने का आरोप
यह शिकायत कथित तौर पर महुआ मोइत्रा के कुछ बयानों से संबंधित है, जिन पर शिकायतकर्ताओं ने हिंदू धार्मिक भावनाओं को आहत करने का आरोप लगाया है। कुछ रिपोर्टों में मामला ‘तुलसी माला’ को लेकर की गई कथित टिप्पणी से जुड़ा बताया गया है। शिकायत में धार्मिक भावनाएं भड़काने, विभिन्न समुदायों के बीच वैमनस्य पैदा करने और आपराधिक धमकी समेत कई आरोप लगाए गए हैं। हालांकि, ये सभी आरोप शिकायत और न्यायिक कार्यवाही का हिस्सा हैं और अदालत ने अभी इन आरोपों की सत्यता पर अंतिम फैसला नहीं दिया है।
पुलिस ने की वारंट जारी होने की पुष्टि
नदिया के पुलिस अधीक्षक अतुल वी. ने पुष्टि की है कि कृष्णानगर की अदालत ने महुआ मोइत्रा के खिलाफ वारंट जारी किया है। पुलिस के मुताबिक, अदालत की ओर से निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन करने के बाद यह कार्रवाई हुई है। इस घटनाक्रम के बाद अब सवाल यह है कि वारंट की तामील किस तरीके से होती है और महुआ मोइत्रा की ओर से अदालत में अगला कानूनी कदम क्या उठाया जाता है।
पहले भी हाई कोर्ट से मिली थी अंतरिम राहत
महुआ मोइत्रा को इस मामले में इससे पहले कलकत्ता हाई कोर्ट से अंतरिम राहत मिल चुकी है। रिपोर्टों के अनुसार, 21 जुलाई को हाई कोर्ट ने उन्हें 5 अक्टूबर तक किसी कठोर कार्रवाई से अंतरिम राहत दी थी। साथ ही उन्हें जांच में सहयोग करने और जांच अधिकारी के सामने पेश होने का निर्देश दिया गया था। बाद में उन्होंने पुलिस पूछताछ में वर्चुअली शामिल होने की अनुमति के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। रिपोर्ट के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने उनकी इस याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया था।
सर्किट हाउस विवाद के बाद फिर चर्चा में महुआ
महुआ मोइत्रा हाल में नदिया सर्किट हाउस विवाद को लेकर भी सुर्खियों में रही थीं। उन्होंने आरोप लगाया था कि संसद सत्र के बाद रात में सर्किट हाउस पहुंचने पर जिला प्रशासन ने उनसे आवंटित कमरा खाली करने को कहा। उनके मुताबिक, इनकार करने के बाद वहां भीड़ जमा हुई और नारेबाजी की गई। महुआ ने इस मामले को लेकर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर नदिया जिले के तीन वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ विशेषाधिकार नोटिस भी दिया था।



