इंदौर। जब भी इंदौर में कोई नया अधिकारी आता है, प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल माने जाने वाले एमवाय अस्पताल की उम्मीदें जगने लगती है। पुराने संभागायुक्तों के नक्शेकदम पर नए संभागायुक्त भास्कर लक्षकार ने भी एमवाय अस्पताल का निरीक्षण किया है। अब अस्पताल को भरोसा है कि उसके दिन बदलेंगे।
दौरे पर दौरे, निर्देश पर निर्देश
एमवाय अस्पताल का दर्द यह है कि वह दिन रात गरीब मरीजों की तीमारदारी में जुटा रहता है, लेकिन उसकी सुध कोई नहीं लेता। सैकड़ों अधिकारी हजारों बार दौरे कर चुके हैं। हर बार निर्देश दिए जाते हैं, लेकिन हालत नहीं सुधरती। अब जो संभागायुक्त हाल ही में यहां से गए हैं, वे भी लगातार दौरा करते थे, हर बार सख्त निर्देश भी देते थे लेकिन शायद ही किसी संबंधित अधिकारी ने ध्यान दिया होगा।
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नए संभागायुक्त ने हिंदी में बोर्ड लगाने को कहा
नए संभागायुक्त भास्कर लक्षकार एवं कलेक्टर शिवम वर्मा गुरुवार सुबह इंदौर के एमवाय अस्पताल संयुक्त रूप से निरीक्षण के लिए पहुंचे। निरीक्षण के दौरान संभागायुक्त एवं कलेक्टर ने एमवाय अस्पताल के ओपीडी, आपातकालीन सेवा, रोगी कल्याण समिति, ब्लड बैंक, नेत्र विभाग, आयुष्मान भारत योजना विभाग सर्जरी सहित विभिन्न विभागों का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान संभागायुक्त लक्षकार ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे एमवाय अस्पताल में उपचार के लिए आने वाले मरीजों की सुविधाओं को सुनिश्चित करने हेतु जगह-जगह संकेत सूचक लगाये। साथ ही मरीजों की मुख्य जांचे हिन्दी भाषा में लिखी जाए।
परिजनों की बैठक व्यवस्था में सुधार के निर्देश
संभागायुक्त ने मरीजों को दी जाने वाली दवाईयों के काउंटरों की संख्या भी बढ़ाई और उसकी व्यवस्था सुधारें। मरीजों के परिजनों की बैठक व्यवस्था में भी सुधार किया जाए। संभागायुक्त लक्षकार ने स्वास्थ्य अधिकारियों और चिकित्सकों से कहा कि मरीज हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए, उनके उपचार में संवेदनशीलता बरते। सभी अधिकारी समय पर अपने विभागों में पहुँचे और गुणवत्ता के साथ कार्य करें।
बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा
संभागायुक्त लक्षकार ने एमवाय अस्पताल के आयुष्मान भारत स्वास्थ्य योजना के तहत लाभान्वित होने वाले मरीजों के बारे में भी स्वास्थ्य अधिकारियों से जानकारी प्राप्त की। उन्होंने अधिकारियों के साथ एमवाय अस्पताल के सभी विभागों का निरीक्षण कर बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान स्वास्थ्य विभाग के क्षेत्रीय संचालक डॉ. शॉजी जोसेफ, एमवाय अस्पताल के अधीक्षक डॉ. अशोक यादव एवं संबंधित अधिकारी मौजूद थे।
यह जरूरी है कि अब न लगे बदनामी का दाग
एमवाय अस्पताल में एक से एक अनुभवी डॉक्टर हैं, लेकिन व्यवस्था की बदहाली के कारण यह कई बार बदनाम भी हुआ है। नए संभागायुक्त को यह ध्यान रखना होगा कि एक बार फिर से इस अस्पताल पर बदनामी का दाग न लगे। कुछ समय पहले ही अस्पताल तब पूरे देश में चर्चा में आया था जब नवजात बच्चों को एनआईसीयू में चूहे कूतर गए थे, जिनसे उनकी मौत हो गई थी। देश के सबसे साफ शहर इंदौर के इस अस्पताल में गंदगी का मामला भी कई बार चर्चा में आया है। हाल ही में यह अस्पताल तब चर्चा में आया था जब एम्बुलेंस के अभाव में परिजन एक बच्चे को स्ट्रेचर पर ले जाते हुए मिले थे।



