इंदौर। आर्मी के एक सूबेदार की जमीन के सीमांकन को लेकर फैलाई गई खबर पूरी तरह झूठी निकली। इतनी झूठी कि खुद शिकायतकर्ता आर्मी सुबेदार ने ही इसका खंडन कर दिया। प्रशासन ने भी इस मामले में स्पष्टीकरण जारी किया है।
कुछ मीडियाकर्मियों द्वारा आज मंगलवार को ऐसी खबर फैलाई गई कि राजौरी के बॉर्डर पर पदस्थ आर्मी सूबेदार नीलेश पांचाल पिछले तीन साल से सीमांकन को लेकर परेशान है। कलेक्टोरेट में भटक रहे हैं, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हो रही। खबरों के अनुसार पांचाल की महू के अंबाचंदन गांव में पुश्तैनी जमीन। पड़ोसी इस पर कब्जा कर रहे हैं, तीन साल से लगातार आवेदन देने के बाद भी अधिकारी सुन नहीं रहे। इन खबरों में ऑपरेशन सिंदूर का हवाला भी दिया गया था।
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सूबेदार पांचाल ने खुद ही किया खंडन
जब यह खबर मीडिया में आई तो सूबेदार पांचाल ने खुद ही इसका खंडन कर दिया। उन्होंने एक वीडियो जारी कर कहा कि उन्होंने 3 मार्च को सीमांकन का आवेदन प्रस्तुत किया था, जो नक्शे में त्रुटियों के कारण खारिज हो गया था। आज यानी मंगलवार 12 मई को कलेक्टर ऑफिस गया था। एसडीएम और तहसीलदार ने मुझे संपूर्ण जानकारी दी। मेरी शिकायत को कुछ पत्रकारों द्वारा गलत तरीके से पेश किया गया, जिसका मैं खंडन करता हूं।
खसरा नंबर 754 में कुल 7 बटांकन
इस संबंध में प्रशासन द्वारा बताया गया कि खसरा नंबर 754 के खसरे में कुल 7 बटांकन हैं। नक्शे में सिर्फ 6 ही दर्ज हैं। 754/4 खसरे में दर्ज है, किंतु नक्शे में दर्ज नहीं है। इसके निराकरण हेतु शिकायतकर्ता से इंद्राज दुरुस्ती का प्रकरण लगवाने हेतु पूर्व में भी तहसीलदार द्वारा दूरभाष पर बात की गई थी, लेकिन आवेदक द्वारा आज तक रिकॉर्ड सुधार प्रकरण नहीं लगाया गया। इसके कारण सीमांकन की कार्यवाही नहीं की जा सकी। रिकॉर्ड सुधार के बाद सीमांकन कर दिया जाएगा।
एसडीएम ने कहा-किसी की गलती नहीं
महू एसडीएम राकेश परमार ने कहा कि आर्मी सूबेदार सीमांकन का मामला खारिज हो गया था। इस मामले में किसी की गलती नहीं है। उनसे कहा गया है कि रिकॉर्ड सुधार का आवेदन लगा दें। इसके बाद मिसिंग खबरे को नक्शे में शामिल कर लिया जाएगा। जब तक वह नक्शे में नहीं आएगा, सीमांकन नहीं हो सकता।



