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भोपाल। इस बार की होली मध्यप्रदेश के लिए अच्छी रही। पूरा प्रदेश रंगों से सराबोर हुआ, ऐसे में विधानसभा कैसे बची रहती। विधानसभा में भी होली की धूम मची। जैसा कि होली में होता है, सब गिले–शिकवे भूल सारे विधायक और मंत्री होली के रंग में डूबे रहे। सबसे अधिक चर्चा इस बात की रही कि मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने सीएम को अपने गीतों पर नचा दिया।
राजनीति तो राजनीति है। यहां हर बात के अलग अर्थ लगाए जाते हैं, हर घटना को अलग चश्मे से देखा जाता है। सीएम यादव और विजयवर्गीय के रिश्तों की बात पूरे देश में है। फिर क्या था, विधानसभा के फाग उत्सव की यह खबर भी नेशनल खबर बन गई। सभी ने यही कहा कि विजयवर्गीय ने अपने गीतों से सीएम को नचा डाला। राजनीतिक हलकों में दोनों के समर्थक और विरोधी इसके कई अर्थ लगा रहे हैं।
भाजपा और कांग्रेस के कई नेता कह रहे हैं कि आगे–आगे देखिए होता है क्या? अभी तो विजयवर्गीय ने गाना गाया, सीएम नाच दिए, लेकिन आगे मोहन की मुरली का कोई भरोसा नहीं। पता नहीं कब किसको ता–ता–थैया करने पर मजबूर कर दे। अभी तक यही होता भी आया है। जब से मोहन भैया सीएम बने हैं, कइयों की नैय्या डूब चुकी है। इसमें विजवर्गीय जैसे नेता जरूर अपनी नैय्या को जैसे–तैसे पार करा ले जाते हैं। कभी गृह मंत्री अमित शाह के नाम पर, तो कभी भाजपा के अन्य राष्ट्रीय नेताओं के नाम पर।
यह तो सबको पता है कि विजयवर्गीय की नैय्या प्रदेश में किस रफ्तार से चल रही है। यही वजह है कि वह बार–बार नैय्या नदी से निकाल भी ले जाते हैं। एक तो सालों बाद प्रदेश में नौकायन का मौका मिला था, लेकिन अपनी आदतों और महत्वाकांक्षाओं के कारण विजयवर्गीय अपनी नौका नहीं संभाल पाए। इंदौर में झांकीबाजी चलती थी, यहां भी प्रभारी बनकर सीएम यादव ने विजयवर्गीय की नौका के आगे खर–पतवार डाल दी। अब नैय्या चलती तो है लेकिन बार–बार हिचकोले खा जाती है।
एक बात और राजनीति में अपनी गायकी से प्रसिद्ध विजयवर्गीय के साथ गोविंदा आला रे गाना गाकर सीएम यादव ने यह भी संदेश दे दिया कि अब एकल गान नहीं चलेगा। भाजपा में सीएम के इस गाने की खूब चर्चा है। नेता विजयवर्गीय के एक प्रसिद्ध गीत छोटी–छोटी गैया…का जिक्र कर कह रहे हैं कि सीएम ने तो यह साफ कह दिया कि अब गोविंदा आ गया है मैदान में। अब यहां और किसी की जरूरत नहीं।



