इंदौर। इंदौर विकास प्राधिकरण (आईडीए) में इन दिनों एक बाबू की खूब चर्चा हो रही है। कामचोरी से परेशान आईडीए अधिकारियों ने इन्हें तीन महीने से संभागायुक्त कार्यालय में अटैच कर रखा था। आईडीए ने सजा तो दे दी, लेकिन बाबू ने इसमें भी मजा ढूंढ लिया। वे तीन महीने से संभागायुक्त कार्यालय पहुंचे ही नहीं। जब खोजबीन हुई तो सूत्रों से पता चला कि बाबू तो एक भाजपा नेता के घर हाजिरी लगा रहे थे।
बताया जा रहा है कि आईडीए में पदस्थ एलडीसी विनोद दुबे अपनी कार्यशैली को लेकर सीईओ डॉ. परीक्षित झाड़े के निशाने पर आए थे। करीब तीन महीने पहले सीईओ ने कार्रवाई करते हुए उन्हें संभागायुक्त कार्यालय में अटैच कर दिया था। इसका मकसद था कि आईडीए से दूर भेजकर उन्हें प्रशासनिक सजा दी जाए।
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तीन महीने तक गायब रहे, तब खुला राज
तीन महीने तक जब विनोद दुबे संभागायुक्त कार्यालय नहीं पहुंचे तो वहां से आईडीए को पत्र भेजकर पूछा गया कि जिस कर्मचारी को यहां अटैच किया गया था, वह ड्यूटी पर क्यों नहीं आ रहा है? आईडीए अधिकारियों के लिए भी यह सवाल चौंकाने वाला था, क्योंकि रिकॉर्ड में कर्मचारी को संभागायुक्त कार्यालय अटैच किया जा चुका था। इसके बाद जब पड़ताल हुई तो मामला और दिलचस्प निकला।
हरिनारायण यादव के यहां हाजिरी लगाने की चर्चा
सूत्र बताते हैं कि जांच के दौरान पता चला कि विनोद दुबे संभागायुक्त कार्यालय के बजाय भाजपा नेता हरिनारायण यादव के यहां हाजिरी लगाते नजर आ रहे थे। ये वही हरिनारायण यादव हैं, जो लंबे समय से आईडीए अध्यक्ष बनने का ख्वाब पाले बैठे हैं। हालांकि इस बार भी भाजपा संगठन उनके अरमानों पर पानी फेरने की पूरी तैयारी में है।
सीईओ ने थमाया नोटिस, वेतन भी रोका
मामला सामने आने के बाद आईडीए सीईओ डॉ. परीक्षित झाड़े ने विनोद दुबे को नोटिस जारी किया है। बताया जा रहा है कि उनकी स्थिति स्पष्ट होने तक वेतन रोकने की कार्रवाई भी की गई है।



