इंदौर। हाल ही में सुपर कॉरिडोर पर सीएम डॉ.मोहन यादव ने एक पांच सितारा होटल ताज विवांता का उद्घाटन किया है। यह वही जमीन है जिसके लिए ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2007 में एमओयू हुआ था। यह एमओयू 51 एकड़ जमीन पर हुआ था, जिसके एक लाख वर्गफुट हिस्से पर यह होटल बना है। सबसे खास बात यह कि ताज ग्रुप के साथ मिलकर इस होटल को बाने वाले अमलतास ग्रुप के मालिक सुरेश भदौरिया हैं, जिनको मेडिकल कॉलेज के फर्जी मान्यता सहित कई घोटाले में भारत सरकार की सारी एजेंसियां ढूंढ रही हैं।
जेकेएम इन्वेस्टमेंट ने किया था एमओयू
प्राप्त जानकारी के अनुसार वर्ष 2007 में हुई ग्लोबल समिट में तत्कालीन सीएम शिवराज सिंह चौहान के सामने जेकेएम इन्वेस्टमेंट लिमिटेड गुरुग्राम के मालिक अभिषेक मोदी और उद्योग विभाग के बीच एमओयू साइन किया गया था। इसमें कहा गया कि इंदौर में बिग मॉल के नाम से एक प्रोजेक्ट आएगा, जिसमें 280 करोड़ रुपए का विदेशी निवेश होगा। इसके लिए सुपर कॉरोडोर पर ग्राम कुम्हेड़ी में 51 एकड़ जमीन तय की गई थी।
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एमओयू के आधार पर आईडीए ने छोड़ी थी जमीन
बताया जाता है कि यह जमीन आईडीए की योजना क्रमांक 179 ए के तहत अधिग्रहित हो चुकी थी। एमओयू हो जाने के बाद आईडीए से यह जमीन छोड़ने को कहा गया। इसके बाद आईडीए ने 51 एकड़ जमीन को मुक्त कर दिया।
जमीन लेने के बाद भी नहीं हुआ विकास
जमीन लेने के बाद भी जेकेएम ने इस पर कोई काम शुरू नहीं किया। इसके बाद उद्योग विभाग अभिषेक मोदी को पत्र लिखता है, लेकिन फिर भी कुछ नहीं होता। कई बार पत्र लिखने के बाद अभिषेक मोदी उस जमीन के एक लाख वर्गफुट पर एक होटल का ढांचा खड़ा कर देते हैं। 2010 में फिर उद्योग विभाग मोदी को पत्र लिखता है कि इस जमीन पर कोई काम नहीं हुआ, क्यों ने एमओयू रद्द कर दिया जाए। इसके बाद मोदी अखबार में विज्ञापन देकर होटल को 45 करोड़ में बेच देते हैं।
आईडीए की अनुमति का खुला उल्लंघन
बताया जाता है कि आईडीए ने इसी शर्त पर जमीन छोड़ी थी कि एमओयू के हिसाब से यहां विकास होगा। सालों तक कोई काम नहीं होने के बाद भी आईडीए सोता रहता है। उसकी नींद खुलती है 2024 में और आईडीए के भू-अर्जन अधिकारी एक पत्र लिखते हैं कि चूंकि शर्तों का पालन नहीं हुआ तो क्यों ने इस जमीन को योजना में शामिल कर लिया जाए। इस पत्र के पहले ही होटल बेचने की कवायद शुरू हो जाती है।
टीएनसीपी और नगर निगम भी नींद में
ताज्जुब तो इस बात का है कि जिस जमीन को सरकार से हुए एक एमओयू के तहत आईडीए की योजना से मुक्त किया जाता है, उसके बारे में नगर एव ग्राम निवेश विभाग तथा नगर निगम के अधिकारी भी आंखों पर पट्टी बांधे बैठे रहते हैं। इसी जमीन पर श्रीराम इनक्लेव नाम के एक आवासीय प्रोजेक्ट की मंजूरी दोनों विभाग मिलकर दे देते हैं।
इसके बाद भी बचे रहेंगे जिम्मेदार?
एक सरकारी एमओयू को लेकर भी सारे विभाग अनजान बने रहे और भूमाफियाओं की मदद करते रहे। अधिकारियों ने सीएम मोहन यादव तक को गुमराह किया। क्या सरकार को करोड़ों रुपए का चूना लगाने वाले टीएनसीपी, आईडीए, नगर निगम तथा अन्य संबंधित विभागों के अधिकारियों पर कोई कार्रवाई होगी?
भदौरिया की संलिप्तता और चौंकाने वाली
इस पूरे मामले में बड़ा सवाल यह है कि जिस अमलतास ग्रुप ने यह होटल खरीदा है, उसके मालिक सुरेश भदौरिया के बारे में प्रदेश के हर अधिकारी को पता है। मेडिकल कॉलेज की फर्जी मान्यता दिलाने में सीबीआई तक जिसके खिलाफ प्रकरण दर्ज कर चुकी है, उस पर सरकारी अधिकारियों ने कैसे भरोसा किया? आखिर कैसे सीएम को इस होटल के उद्घाटन में आने दिया।
फर्जीवाड़े का मास्टर है भदौरिया
सुरेश सिंह भदौरिया का नाम इंडेक्स मेडिकल कॉलेज से जुड़े पुराने मेडिकल प्रवेश विवादों में भी आया था। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के 2019 के एक आदेश में सीबीआई की ओर से मेडिकल प्रवेश में कथित अनियमितताओं और कॉलेज प्रबंधन की भूमिका को लेकर लगाए गए आरोपों का उल्लेख है। यह मामला व्यापमं से जुड़े पीएमटी-2012 और पीएमटी-2013 के मामलों से संबंधित था।



