इंदौर। भागीरथपुरा में गंदे पानी से हो रही मौतों के मामले ने शहर की राजनीतिक तस्वीर बिल्कुल साफ कर दी है। एक तरफ भाजपा जहां इससे पल्ला झाड़ती नजर आ रही है, वहीं कांग्रेस भागीरथपुरा की जनता के साथ खड़ी नजर आ रही है। आज यानी बुधवार को जब भागीरथपुरा में 30वीं मौत हुई, तो भाजपा के नगर अध्यक्ष उस परिवार को सांत्वना देने की बजाए इंदौर में एसआईआर की सफलता की पार्टी दे रहे थे। वहीं, शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे अर्थी का कांधा देते नजर आए।
यह विडंबना है कि देश में स्वच्छता के लिए अपनी पहचान बनाने वाले इंदौर में गंदा पानी पीने से लोगों की मौत हो रही है। इससे भी बड़ी विडंबना है कि इसके लिए जिम्मेदार जनप्रतिनिधि ‘जन’ से दूर भाग रहे हैं। ऐसा लगता है जैसा इसमें उनका कोई योगदान नहीं है। शुरुआत से ही इस पर भाजपा के मंत्री और नेताओं का जो रुख दिखा, वह सबको आश्चर्य में डाल रहा है। पहले तो जिनकी विधानसभा में यह घटना हुई, उन्होंने तो पूरे देश में ही भाजपा और इंदौर का घंटा बजवा दिया। पहले उन्हें लगा कि इस बार भी लोगों को भोजन-भंडारे से मना लिया जाएगा, लेकिन यहां बात मौतों की थी। जब जनता ने विरोध करना शुरू किया तो अज्ञातवास पर चले गए।
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चुप्पी साधने में माहिर हैं नगर अध्यक्ष
इस पूरे मामले में भाजपा के नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा की भूमिका न तो भाजपा कार्यकर्ताओं को समझ आ रही, न ही लोग समझ पा रहे। जब घटना हुई तो वे इयर इंड मनाने तीर्थयात्रा पर थे। जब लौटकर आए तब भी उन्होंने दूरी बनाकर रखी। चूंकि इस मामले पर बयान देने से सब बच रहे थे, लेकिन भागीरथपुरा जाकर वहां के लोगों का दर्द बांटकर उनकी समस्या दूर कराने का काम तो कर ही सकते थे। मिश्राजी ने इस पूरे मामले में चुप्पी साधे रखी।
मौत की सूचना के बाद भी मनाई पार्टी
सूत्र बताते हैं कि नगर अध्यक्ष ने इंदौर में एसआईआर की सफलता पर बुधवार को ही पार्टी दी। इसमें नगर के पदाधिकारियों के अलावा सभी विधायकों तथा वरिष्ठ नेताओं को बुलाया गया था। इसमें कई विधायक पहुंचे भी, लेकिन कुछ किनारा कर गए। इसी दौरान भागीरथपुरा में मौत का मातम चल रहा था। आज ही 30वीं मौत हुई थी। इसके बाद भी मिश्रा अपनी कामयाबी के जश्न में टिक्कड़ खाते और खिलाते रहे। इतना ही नहीं मिश्राजी ने सबको बोल दिया कि कोई फोटो वगैरह सोशल मीडिया पर नहीं डालेगा। यह निहायत ही निजी पार्टी है।
जब से संभाला है कार्यभार तब से हो रहे विवाद
मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की कृपा से नगर अध्यक्ष की कुर्सी पर विराजमान सुमित मिश्रा ने जब से कार्यभार संभाला है, तब से विवादों में घिरे रहे हैं। जब नगर कार्यकारिणी घोषित हुई थी, तब विरोध इतना जबरदस्त हुआ कि इंदौर के इतिहास में पहली बार भाजपा कार्यालय पर अपने ही नगर अध्यक्ष के खिलाफ प्रदर्शन हुआ। पुतले जलाए गए, नारे लगाए गए, पोस्टर के साथ ही भाजपा कार्यालय में घुसकर नगर अध्यक्ष के नेमप्लेट पर कालिख पोती गई। तब भी मिश्राजी से लोग कड़े एक्शन की उम्मीद कर रहे थे, लेकिन वे एकांतवाश में चले गए थे।
अब एमआईसी को निपटाने की फितरत
सूत्र बताते हैं कि जब भागीरथपुरा के मामले में संगठन स्तर पर कार्रवाई का दबाव बना तो मिश्राजी महापौर परिषद को ही निपटाने में जुट गए। उन्होंने प्रस्ताव दिया कि पूरी महापौर परिषद ही बदल दी जाए। फिर ऊपर से कहा गया कि ऐसा करना गलत हो जाएगा। इसके बाद नगर अध्यक्ष ने कहा कि सबके विभाग बदल दो। अब मिश्राजी अपने पार्षदों को महापौर परिषद में प्रवेश दिलाने की पूरी कोशिश में जुट गए हैं। कहा जा रहा है कि वे हर हाल में बबलू शर्मा को महापौर परिषद से बाहर करना चाहते हैं।
मनीष मामा बने हैं सलाहकार
मिश्राजी से पहले मनीष मामा के कैसे संबंध थे, यह सबको पता है। लेकिन, इन दिनों दोनों में जबरदस्त बन रही है। बताया जाता है कि यह समझौता मंत्रीजी ने ही कराया है। अब मंत्रीजी की कृपा से कुर्सी मिली है तो उनकी सुननी भी पड़ेगी। सूत्र तो बताते हैं कि महापौर परिषद वाले मामले में मनीष मामा भी मिश्राजी के सलाहकार हैं। अब देखना यह है कि कार्रवाई के नाम पर नगर अध्यक्ष अपना महापौर परिषद में अपना कितना खेल जमा पाते हैं।



