आशुतोष रांका और सौरव दास की न्यायिक हिरासत को लेकर दिल्ली की अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) ने दोनों नेताओं की न्यायिक हिरासत 21 अक्टूबर 2026 तक दो दिन और बढ़ा दी है। यह आदेश 19 अक्टूबर को दिया गया। इस फैसले के बाद दोनों नेताओं को तिहाड़ जेल में ही रखा गया है।
आशुतोष रांका और सौरव दास की गिरफ्तारी और हिरासत का इतिहास
आशुतोष रांका और सौरव दास को 13 अक्टूबर 2026 को दिल्ली के जंतर-मंतर से हिरासत में लिया गया था। पुलिस ने आरोप लगाया कि दोनों ने बिना अनुमति प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश किया था। इसके बाद 14 अक्टूबर को अदालत ने उन्हें पांच दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया था, जो 19 अक्टूबर को समाप्त हो रही थी।
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अदालत ने 19 अक्टूबर को दोनों की हिरासत दो दिन के लिए बढ़ा दी है। अगली सुनवाई 21 अक्टूबर को होगी। फिलहाल दोनों नेताओं को तिहाड़ जेल में रखा गया है।

मामले के मुख्य आरोप और विरोध प्रदर्शन की पृष्ठभूमि
आशुतोष रांका और सौरव दास पर जंतर-मंतर के प्रतिबंधित क्षेत्र में बिना अनुमति प्रवेश करने, धारा 144 के तहत लगे निषेधाज्ञा का उल्लंघन करने, शांति बॉन्ड की शर्तों का उल्लंघन और सरकारी कार्य में बाधा डालने के आरोप हैं।
यह विरोध प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर आयोजित किया गया था। इन नेताओं और उनके समर्थकों ने मतदाता सूची में गड़बड़ी के आरोप लगाते हुए प्रदर्शन किया था।
अदालत में हुई कार्रवाई और सुरक्षा से जुड़ी चिंताएं
19 अक्टूबर को अदालत में दोनों पक्षों की दलीलें सुनी गईं। पुलिस ने हिरासत बढ़ाने की मांग की जबकि बचाव पक्ष ने इस पर आपत्ति जताई। अदालत ने पुलिस की दलील मानते हुए हिरासत की अवधि बढ़ाई।
साथ ही, मामले की सुनवाई कर रहे स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट को धमकी मिलने का मामला भी सामने आया है। पुलिस ने संसद मार्ग थाने में गैर-संज्ञेय अपराध दर्ज किया है। यह मामला सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाता है।

कोर्ट प्रक्रिया और जमानत के प्रयास
कॉकरोच जनता पार्टी की कानूनी टीम ने जमानत से जुड़े दस्तावेज जमा किए थे। हालांकि, सुरक्षा बॉन्ड और धमकी के मामलों के कारण रिहाई में देरी हुई है।
जमानत की प्रक्रिया लंबित है और अदालत ने हिरासत बढ़ाकर मामले की गंभीरता को दर्शाया है। अगली सुनवाई में इस पर और चर्चा हो सकती है।
आम जनता पर इस कार्रवाई का प्रभाव
इस मामले ने दिल्ली में विरोध-प्रदर्शन और सरकारी सुरक्षा व्यवस्था पर ध्यान केंद्रित कर दिया है। निषेधाज्ञा और सुरक्षा नियमों का उल्लंघन गंभीर माना जाता है, जिससे कानून व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
आम जनता में इस घटना को लेकर चिंता है कि विरोध के दौरान शांति और सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाएगी। साथ ही, कानूनी प्रक्रिया में देरी से लोगों का भरोसा प्रभावित हो सकता है।



