जातिगत जनगणना को लेकर एक बार फिर सियासी बहस तेज हो गई है। कांग्रेस ने केंद्र सरकार से सवाल किया है कि Census 2027 में जाति से जुड़ी जानकारी किस तरीके से जुटाई जाएगी और इस प्रक्रिया को तय करने से पहले राजनीतिक दलों से चर्चा क्यों नहीं की गई।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने 6 मई 2025 को प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर जातिगत जनगणना के सवालों और प्रक्रिया को लेकर सुझाव दिए थे, लेकिन उनकी प्रमुख मांगों को नजरअंदाज किया गया। कांग्रेस के अनुसार, खड़गे ने इससे पहले 16 अप्रैल 2023 को भी जातिगत जनगणना की मांग की थी।
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कांग्रेस ने खास तौर पर तेलंगाना मॉडल को अपनाने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि जाति संबंधी सवालों के लिए पहले से तैयार राज्यवार सूची उपलब्ध होनी चाहिए, ताकि लोगों को अपनी जाति बताने में स्पष्टता रहे और आंकड़े अधिक व्यवस्थित एवं विश्वसनीय तरीके से सामने आएं। कांग्रेस ने जातिगत जनगणना की प्रक्रिया में विशेषज्ञों, सामाजिक संगठनों और राजनीतिक दलों की भागीदारी की भी वकालत की है।
वहीं, सरकारी दस्तावेजों के अनुसार Census 2027 की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। भारत के रजिस्ट्रार जनरल एवं जनगणना आयुक्त के कार्यालय ने इसके लिए विभिन्न राजपत्र अधिसूचनाएं जारी की हैं।
मुद्दा सिर्फ जाति की गिनती का नहीं, बल्कि सही डेटा, पारदर्शिता और सामाजिक न्याय से जुड़ा है। जातिगत आंकड़े भविष्य की सरकारी नीतियों, आरक्षण, कल्याणकारी योजनाओं और संसाधनों के बेहतर वितरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
अब सवाल जनता से
क्या Census 2027 में जातिगत जनगणना के लिए स्पष्ट और विस्तृत सवाल पूछे जाने चाहिए?
क्या राजनीतिक दलों और विशेषज्ञों से चर्चा करके इसकी प्रक्रिया तय होनी चाहिए?
क्या आपको लगता है कि तेलंगाना मॉडल पूरे देश के लिए बेहतर विकल्प हो सकता है?
अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं।



