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इंदौर। हर साल आषाढ़ शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को गुरु पूर्णिमा मनाया जाता है। इस साल यह पर्व 21 जुलाई को मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस मौके पर गुरुओं की पूजा का विधान है, जो लोग इस दौरान पूजा–पाठ और दान–पुण्य करते हैं, उनका जीवन खुशियों से भरा रहता है। इसके साथ ही घर की दरिद्रता और रोग–दोष का नाश होता है। इस साल गुरु पूर्णिमा पर कई दुर्लभ योगों का संयोग बन रहा है, जिसके कारण इसका महत्व और भी बढ़ जाता है। आइए इस लेख में इन्हीं योग के बारे में विस्तार से जानते हैं।
गुरु पूर्णिमा पर इस बार कई दुर्लभ संयोग पड़ रहे हैं। इसमें सर्वार्थ सिद्धि योग भी है। यह योग तब बनता है जब कोई विशेष दिन किसी विशेष नक्षत्र के साथ मिलता है। इस योग में किए गए सभी कार्य सफल होते हैं, इसलिए इसे शुभ कार्यों के लिए उत्तम माना जाता है। इस बार गुरु पूर्णिमा पर सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है। यह योग 21 जुलाई को सुबह 05 बजकर 36 मिनट से शुरू होकर 22 जुलाई को मध्य रात्रि 12 बजकर 14 मिनट पर समाप्त होगा।
इसके अलावा इस बार प्रीति योग भी बन रहा है। प्रीति योग का प्रमुख ग्रह बुध होता है, यह योग उन 14 योगों में से एक है जिन्हें बहुत शुभ माना गया है। यह योग 21 जुलाई को रात 09 बजकर 11 मिनट से शुरू होकर 22 जुलाई को शाम 05 बजकर 58 मिनट पर समाप्त होगा। इस योग में किए गए सभी कार्य सफल होते हैं। इसी तरह विष्कंभ योग भी बन रहा है। यह योग 21 जुलाई को मध्य रात्रि 12 बजकर 08 मिनट से शुरू होकर 21 जुलाई को रात 09 बजकर 11 मिनट पर समाप्त होगा।
कल इन वस्तुओं का करें दान
गुरु पूर्णिमा पर जल से भरा मिट्टी का घड़ा, अनाज, फल, वस्त्र, सफेद चीजों (मिठाई–वस्त्र) का दान करने का खास महत्व है। इस दौरान दान–पुण्य करने से जीवन में शुभता आती है। घर की आर्थिक मुश्किलें समाप्त होती हैं। इसके अलावा सभी कार्य में सफलता प्राप्त होती है। ऐसा माना जाता है कि पूर्णिमा तिथि पर दान–पुण्य के साथ हवन, पूजन भी जरूर करना चाहिए।



