फिल्म समीक्षा: ‘राहु केतु’ में हल्की-फुल्की कॉमेडी का डोज

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-डॉ. प्रकाश हिन्दुस्तानी, वरिष्ठ पत्रकार

राहु केतुएक फैंटेसीकॉमेडी फिल्म है, जिसमें भारतीय पौराणिक राहुकेतु की अवधारणा को हास्य, जादू और एक्शन के साथ मिलाकर दिखाने का प्रयोग किया है। फिल्म का टोन हल्काफुल्का मनोरंजक है। फुकरे वाली जोड़ी पुलकित सम्राट और वरुण शर्मा फिर स्क्रीन पर है। अपेक्षाकृत साफ़ सुथरी इस फिल्म को परिवार के साथ देखा जा सकता है।

एक संघर्षरत लेखक चूरू लाल शर्मा (मनु ऋषि चड्डा) को एक जादुई नोटबुक मिलती है। इस नोटबुक से दो बेवकूफ लेकिन प्यारे किरदार राहु (वरुण शर्मा) और केतु (पुलकित सम्राट) जन्म लेते हैं। ये दोनों अपने अस्तित्व को बचाने के लिए नोटबुक को वापस लाने की जद्दोजहद में पड़ जाते हैं, क्योंकि एक चालाक लड़की (शालिनी पांडे) इसे चुरा लेती है।

ड्रग माफिया, करप्शन, अपशकुन की अफवाहें और पौराणिक ट्विस्ट बीच में जुड़ते हैं। फिल्म में संवाद रोचक हैं। राहु और केतु बीच एक सवाल का जवाब दूसरे सवाल से होता है। राहु केतु का दिमाग ख़राब होता है लेकिन उनके संस्कार अच्छे दिखाए गए हैं। वे पागलपंथी की परंपरा का अनुसरण अच्छे से करते नहीं अघाते।

शुरुआत मजेदार है, पौराणिक एलिमेंट्स को कठपुतली, जादू और एआईस्टाइल विजुअल्स और हास्य के साथ पेश किया गया है। सेकंड हाफ में थोड़ी असंगति है। फिर भी, कर्म, दोस्ती और किस्मत जैसे मैसेज हल्केफुल्के अंदाज में दिए गए हैं। कहानी फ्रेश और अलग है, लेकिन बैलेंस कभीकभी डगमगाता है।

विपुल विग ने इसमें अपना डायरेक्टोरियल डेब्यू किया है। उन्होंने पौराणिक और मॉडर्न कॉमेडी का मेल अच्छे से किया। फिल्म की शुरुआत के क्रेडिट्स (पीयूष मिश्रा की आवाज में) बेहद इंप्रेसिव हैं। सिचुएशनल कॉमेडी और एकदो लाइनर्स अच्छे हैं, लेकिन कुछ जगहों पर पेसिंग ढीली पड़ जाती है और सीन अनावश्यक लंबे हो जाते हैं। हिमाचल प्रदेश की लोकेशन सुंदर हैं।

पीयूष मिश्रा का मेकअप बिलकुल जग्गी वासुदेव से मिलता है, वैसी ही दाढ़ी, वैसा ही हावभाव, लेकिन आवाज़ अलग है। हीरोइन शालिनी पांडे ने अपनी चालाक और ग्लैमरस भूमिका में है। चंकी पांडे , अमित स्याल और सुमित गुलाटी ने अपने छोटेछोटे रोल्स अच्छे किये हैं।

हल्कीफुल्की कॉमेडी फिल्म है। झेलनीय !

Ardhendu Bhushan
Ardhendu Bhushanhttp://www.hbtvnews.com
Ardhendhu Bhushan is a senior consulting editor with extensive experience in the media industry. He is recognized for his sharp editorial insight and strategic guidance.

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