उज्जैन में महाकाल मंदिर सुरक्षा परखने उतरे 150 एनएसजी कमांडो ने गुरुवार-शुक्रवार की दरमियानी रात महाकाल मंदिर परिसर में मॉक ड्रिल का सफल आयोजन किया। यह अभ्यास रात 11 बजे शुरू होकर तड़के 2 बजे तक चला।
महाकाल मंदिर परिसर में एनएसजी मॉक ड्रिल का आयोजन
मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर में राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी) की टीम ने सुरक्षा व्यवस्था की कड़ी परख के लिए मॉक ड्रिल की। इस अभ्यास में मुंबई की एनएसजी टीम के साथ-साथ मध्य प्रदेश पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स, स्थानीय जिला पुलिस और मंदिर प्रबंधन समिति के अधिकारी भी शामिल थे।
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लगभग 150 ब्लैक कैट कमांडो बुलेटप्रूफ वाहनों सहित आधुनिक हथियारों और सामरिक गियर के साथ महाकाल लोक के नंदी द्वार से अभ्यास में शामिल हुए।

मॉक ड्रिल का मुख्य उद्देश्य और संचालन
इस मॉक ड्रिल का प्राथमिक उद्देश्य महाकाल मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था में संभावित आतंकी हमले जैसी आपात स्थिति में त्वरित और प्रभावी प्रतिक्रिया क्षमता का परीक्षण करना था।
अभ्यास के दौरान काल्पनिक आतंकवादियों की तलाश, उन्हें नियंत्रण में लेने और नकली बंधकों को सुरक्षित बाहर निकालने के ऑपरेशन का पूर्वाभ्यास किया गया। इससे सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय और तत्परता सुनिश्चित होती है।
मॉक ड्रिल में शामिल सुरक्षा बलों की भूमिका
एनएसजी के कमांडो के साथ मध्य प्रदेश पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स और स्थानीय पुलिस ने भी सक्रिय भूमिका निभाई। जिला प्रशासन के अधिकारी और मंदिर प्रबंधन समिति के प्रभारी इस अभ्यास को सफल बनाने में सहयोगी रहे।
एडिशनल एसपी आलोक शर्मा ने बताया कि यह अभ्यास सुरक्षा बलों की तत्परता और आपसी समन्वय की जांच के लिए बेहद महत्वपूर्ण था।
महाकाल मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने की पहल
महाकाल मंदिर में रोजाना हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं, खासकर पर्वों के दौरान यह संख्या और बढ़ जाती है। इसलिए सुरक्षा व्यवस्था को अधिक सुदृढ़ बनाना जरूरी है।
एनएसजी की यह मॉक ड्रिल मंदिर की सुरक्षा में संभावित खामियों की पहचान कर उन्हें दूर करने का एक प्रभावी तरीका है। इससे आपातकालीन स्थिति में सुरक्षा बल तेजी से और संगठित तरीके से प्रतिक्रिया कर सकेंगे।
मॉक ड्रिल के दौरान रणनीतिक स्थानों पर तैनाती
कमांडो ने महाकाल लोक के मानसरोवर क्षेत्र से लेकर त्रिनेत्र कंट्रोल रूम तक विभिन्न रणनीतिक स्थानों पर मोर्चा संभाला। यह अभ्यास वास्तविक स्थिति के अनुरूप किया गया ताकि सुरक्षा प्रोटोकॉल की प्रभावशीलता का सही आकलन हो सके।
इस दौरान सुरक्षा बलों ने संभावित घुसपैठ को रोकने और आपातकालीन निकास मार्गों की सुरक्षा को भी परखा।
आगे की तैयारियों और सुरक्षा जागरूकता
इस मॉक ड्रिल से प्राप्त अनुभवों के आधार पर उज्जैन प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां महाकाल मंदिर परिसर की सुरक्षा में और सुधार करेंगी।
साथ ही, आम जनता में सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने और आपातकालीन स्थिति में सही प्रक्रिया अपनाने के लिए भी कदम उठाए जाएंगे।



