नाजिया खान इलाही ने उज्जैन के रामघाट पर पितरों का श्राद्ध कर सनातन परंपरा का सम्मान किया। इस धार्मिक अनुष्ठान के दौरान उन्होंने सुरक्षा और सामाजिक मुद्दों पर भी अपनी चिंता जताई।
उज्जैन के रामघाट पर पितरों का श्राद्ध करने का आयोजन
10 अक्टूबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता और भाजपा नेता नाजिया इलाही खान ने उज्जैन स्थित क्षिप्रा नदी के रामघाट पर अपने पूर्वजों के लिए तर्पण और पिंडदान किया। यह अनुष्ठान सर्वपितृ अमावस्या के पावन अवसर पर संपन्न हुआ। उन्होंने इसे अपने पूर्वजों के प्रति आभार व्यक्त करने और मानवता का संदेश देने के रूप में देखा।
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श्राद्ध कर्म करते हुए नाजिया खान ने बताया कि उनके पूर्वज मुगलों के समय में हिंदू धर्म से इस्लाम में परिवर्तित हुए थे। इसके बावजूद वह सनातन धर्म की परंपराओं का सम्मान करती हैं।

धार्मिक मान्यताओं पर नाजिया खान की सोच
मीडिया से बातचीत में नाजिया ने कहा कि उनके धर्म में श्राद्ध को कुफ्र या हराम माना जाता है, लेकिन वह इसे अपने पूर्वजों के प्रति निष्ठा और श्रद्धा के रूप में देखती हैं। उन्होंने इस अनुष्ठान को धर्म और आस्था से ऊपर उठकर मानवता का संदेश बताया।
यह कदम एक सामाजिक और धार्मिक संवाद को जन्म दे सकता है, जो विभिन्न समुदायों के बीच समझ और सम्मान को बढ़ावा दे।
सुरक्षा संबंधी चिंताएं और धमकियों का आरोप
श्राद्ध के दौरान नाजिया इलाही खान ने कट्टरपंथियों से अपनी जान को खतरा बताया। उन्होंने कहा कि उन्हें धमकियां मिल रही हैं और इस मामले में यूपी एटीएस और दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच सहित अन्य सुरक्षा एजेंसियों को सूचित किया गया है।
उनकी सुरक्षा को लेकर चिंताएं न केवल व्यक्तिगत स्तर पर महत्वपूर्ण हैं, बल्कि यह व्यापक सामाजिक सुरक्षा और शांति के लिए भी संकेत देती हैं।
नवरात्रि में महिलाओं की सुरक्षा पर नाजिया की अपील
श्राद्ध से पहले इंदौर में आयोजित प्रेस वार्ता में नाजिया खान ने आगामी नवरात्रि और गरबा आयोजनों के दौरान हिंदू बेटियों और महिलाओं की सुरक्षा के लिए कड़े कदम उठाने की मांग की। उन्होंने लव जिहाद के मामलों पर भी सख्त कार्रवाई का आह्वान किया।
यह सामाजिक सुरक्षा और धार्मिक आयोजनों की सहजता के लिए एक महत्वपूर्ण मुद्दा है, जिसे लेकर प्रशासन को भी सतर्क रहने की आवश्यकता है।
नाजिया खान का अतीत और धार्मिक आस्था
नाजिया इलाही खान तीन तलाक के खिलाफ कानूनी लड़ाई के लिए भी जानी जाती हैं। इससे पहले वे दो बार बाबा महाकाल के दर्शन और पूजा-अर्चना कर चुकी हैं। यह उनके धर्म और आस्था के प्रति समर्पण को दर्शाता है।
उनका यह कदम धार्मिक सहिष्णुता और सामाजिक समरसता की मिसाल माना जा सकता है।
आगे की संभावनाएं और सामाजिक प्रभाव
नाजिया खान का यह श्राद्ध कर्म और उसके साथ जुड़ी सुरक्षा चिंताएं सामाजिक संवाद को प्रभावित कर सकती हैं। यह विभिन्न समुदायों के बीच धार्मिक सहिष्णुता और सुरक्षा के मुद्दों पर नई बहस शुरू कर सकता है।
आगे प्रशासन की भूमिका और सुरक्षा एजेंसियों की प्रतिक्रिया इस मामले को शांतिपूर्वक सुलझाने में अहम रहेगी।



