पूर्व ईडी डिप्टी डायरेक्टर निरंजन सिंह खालिस्तान समर्थक अमृतपाल सिंह की पार्टी में शामिल होने जा रहे हैं। यह राजनीतिक कदम पंजाब में ड्रग्स के खिलाफ संघर्ष को और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है। निरंजन सिंह का यह निर्णय उनके जालंधर स्थित निवास पर हुई एक बैठक के बाद आया है, जिसमें अमृतपाल सिंह के पिता तरसेम सिंह और विधायक मनप्रीत सिंह अयाली भी उपस्थित थे।
निरंजन सिंह का अकाली दल वारिस पंजाब दे में शामिल होना
निरंजन सिंह प्रवर्तन निदेशालय (ED) के पूर्व डिप्टी डायरेक्टर हैं, जिन्होंने मई 2021 में सेवानिवृत्ति ली थी। अब वे खडूर साहिब से सांसद और खालिस्तान समर्थक अमृतपाल सिंह के नेतृत्व वाले दल ‘अकाली दल वारिस पंजाब दे’ (AD-WPD) में शामिल होंगे। इस शामिल होने की औपचारिक घोषणा 23 सितंबर 2026 को चंडीगढ़ में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान की जाएगी।
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ड्रग्स के खिलाफ संघर्ष में निरंजन सिंह का योगदान
निरंजन सिंह ने ईडी में रहते हुए पंजाब के कई हाई-प्रोफाइल ड्रग्स मामलों की जांच की है। उन्होंने भोला ड्रग रैकेट और राजा कंदोला मामले की गहन जांच की थी। इसके अलावा, अकाली दल के पूर्व मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया और पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के बेटे रणइंदर सिंह से भी पूछताछ की थी। उनकी जांच ने पंजाब में नशे के खिलाफ कार्रवाई को एक नया आयाम दिया।
तबादले और न्यायालय की भूमिका
निरंजन सिंह के जालंधर से कोलकाता तबादले ने खूब चर्चा बटोरी थी। उन्होंने इसे अपनी जांच को प्रभावित करने का प्रयास बताया था। इस तबादले के खिलाफ पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय का रुख किया गया और तबादले पर रोक लगाई गई। यह घटनाक्रम उनके ईमानदार और प्रभावशाली जांच अधिकारी के रूप में छवि को मजबूत करता है।

अकाली दल वारिस पंजाब दे में शामिल होने का कारण
निरंजन सिंह ने स्पष्ट किया है कि वे इस पार्टी को पंजाब में ड्रग्स के खात्मे के लिए सबसे गंभीर और प्रतिबद्ध पार्टी मानते हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और अकाली-भाजपा सरकारें इस संकट को रोकने में विफल रही हैं। इसलिए, उन्होंने राजनीतिक क्षेत्र में सक्रिय होकर इस समस्या से लड़ने का फैसला किया है।
आगे की संभावनाएं और राजनीतिक प्रभाव
निरंजन सिंह के इस कदम से पंजाब की राजनीति में नई हलचल आने की संभावना है। ड्रग्स के खिलाफ उनके अनुभव और कड़ी छवि के कारण पार्टी को मजबूती मिलेगी। इसके अलावा, आम जनता के बीच भी यह संदेश जाएगा कि ड्रग्स के खिलाफ लड़ाई में अब और अधिक गंभीरता बरती जा रही है। आने वाले दिनों में इस गठबंधन की रणनीतियों और चुनावी प्रभाव पर नजर बनी रहेगी।
निरंजन सिंह के राजनीतिक करियर की शुरुआत
ईडी से 2018 में इस्तीफा देने के बाद निरंजन सिंह का यह राजनीतिक क्षेत्र में पहला बड़ा कदम माना जा रहा है। उन्होंने जांच में गहराई और निष्पक्षता दिखाकर अपना नाम बनाया। अब वे अकाली दल वारिस पंजाब दे के साथ मिलकर पंजाब के सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर काम करेंगे। यह बदलाव उनके लिए नई जिम्मेदारियों और चुनौतियों को लेकर आएगा।



