रुचि ग्लोबल के 66 करोड़ रुपये के बैंक घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की कार्रवाई ने इस मामले को नई दिशा दी है। इस बैंक धोखाधड़ी में शामिल आरोपियों के खिलाफ ईडी ने इंदौर की विशेष पीएमएलए कोर्ट में चार्जशीट दायर कर जांच को मजबूत किया है।
ईडी ने इंदौर की पीएमएलए कोर्ट में चार्जशीट दायर की
रुचि ग्लोबल लिमिटेड से जुड़े 66 करोड़ रुपये के बैंक घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय ने 1 अक्टूबर 2026 को इंदौर की पीएमएलए कोर्ट में प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट दायर किया। इस चार्जशीट में कुल 21 आरोपियों और संबंधित कंपनियों को नामजद किया गया है। कोर्ट ने आरोपियों को प्री-कॉग्निजेंस हियरिंग के लिए नोटिस जारी कर सुनवाई की प्रक्रिया शुरू की है।
👉 यह भी पढ़ें:

रुचि ग्लोबल लिमिटेड का नाम अब एग्रोट्रेड एंटरप्राइजेज लिमिटेड है
यह घोटाला रुचि ग्लोबल लिमिटेड से जुड़ा है, जिसे अब एग्रोट्रेड एंटरप्राइजेज लिमिटेड के नाम से जाना जाता है। कंपनी के मुख्य प्रमोटर उमेश शाहरा, साकेत बरोडिया और आशुतोष मिश्रा इस मामले में प्रमुख आरोपी हैं। जांच शुरू हुई थी सीबीआई भोपाल द्वारा दर्ज प्राथमिकी के आधार पर, जिसमें बैंकों के कंसोर्टियम को वित्तीय नुकसान पहुंचाने का आरोप था।
66 करोड़ की धोखाधड़ी का तरीका और बैंक कंसोर्टियम
ईडी की जांच में पता चला कि कंपनी ने पंजाब नेशनल बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा और जम्मू एंड कश्मीर बैंक के कंसोर्टियम से लगभग 66 करोड़ रुपये की नॉन-फंड-बेस्ड क्रेडिट सुविधाएं धोखाधड़ी से हासिल कीं। कंपनी ने कृषि-उत्पाद खरीदने के नाम पर फर्जी दस्तावेज, बिल ऑफ एक्सचेंज और नकली ट्रांसपोर्ट रसीदें बनाई। इन दस्तावेजों के आधार पर लेटर ऑफ क्रेडिट खोले गए थे।
मनी लॉन्ड्रिंग के जटिल नेटवर्क का खुलासा
एलसी को डिस्काउंट कराने के बाद मिली राशि को शेल और लेयरिंग कंपनियों के नेटवर्क के जरिए घुमाया गया। यह रकम 1 से 3 दिनों के भीतर वापस रुचि ग्लोबल के बैंक खातों में जमा कर दी गई। भुगतान न होने के कारण बैंकों को भारी नुकसान हुआ। इस प्रकार, धोखाधड़ी के साथ-साथ मनी लॉन्ड्रिंग की भी पुष्टि हुई।
ईडी की पूर्व छापेमारी और संपत्ति कुर्की
ईडी ने 23 दिसंबर 2025 को छापेमारी कर 23.50 लाख रुपये की नकदी जब्त की थी। बैंक खातों को फ्रीज भी किया गया। बाद में 18 फरवरी 2026 को 5.13 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति को अस्थायी रूप से कुर्क किया गया। ये कदम जांच को और प्रभावी बनाने के लिए उठाए गए थे।
यह बैंक धोखाधड़ी आम जनता पर क्या असर डालती है?
ऐसे बड़े बैंक घोटाले से बैंकों का वित्तीय स्वास्थ्य प्रभावित होता है, जिससे आम लोगों को कर्ज मिलना कठिन हो सकता है। बैंक की विश्वसनीयता घटती है और आर्थिक प्रणाली में अविश्वास बढ़ता है। इसलिए प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई से वित्तीय अनुशासन में सुधार की उम्मीद है।



