दिल्ली हाई कोर्ट ने हाल ही में अपने एक फैसले में भारत में मजदूरों को मिलने वाले सबसे कम वेतन और उनकी कड़ी मेहनत के प्रति समाज में सम्मान की कमी पर गंभीर चिंता जताई है। न्यायाधीश विमल कुमार यादव ने अपने निर्णय में कहा कि देश में शारीरिक श्रम करने वाले मजदूरों की सबसे कम परवाह की जाती है, जबकि पश्चिमी देशों की तुलना में उनकी स्थिति दयनीय बनी हुई है।
17 मार्च 2002 की घटना में मजदूर पर हमला
यह मामला दिल्ली के चांदनी चौक स्थित लाजपत राय मार्केट का है, जहां 17 मार्च 2002 की रात राजिंदर कुमार नाम के मजदूर दुकान के बरामदे में सो रहे थे। इसी दौरान आरोपी वीर पाल और उसके साथी शोर-शराबा कर रहे थे। जब राजिंदर कुमार ने उन्हें शांति बनाए रखने को कहा तो गुस्साए आरोपी ने रापी से हमला कर दिया। इस हमले से राजिंदर कुमार के चेहरे और छाती पर गंभीर चोटें आईं।
दिल्ली हाई कोर्ट ने मजदूरों को सबसे कम वेतन मिलने और सम्मान की कमी पर जताई चिंता
जस्टिस विमल कुमार यादव ने अपने फैसले में कहा कि भारत में मजदूरों को सबसे कम वेतन मिलता है और उनकी कड़ी मेहनत की कद्र नहीं होती। उन्होंने यह भी कहा कि हमारा समाज शारीरिक श्रम की अहमियत समझने में पूरी तरह नाकाम रहा है। कोर्ट ने यह टिप्पणी इस बात पर दुख जताते हुए की कि मजदूरों को उचित सम्मान और वेतन नहीं मिलना एक आम समस्या बन गई है।
सजा में बदलाव और धाराओं में संशोधन
दिल्ली हाई कोर्ट ने आरोपी वीर पाल की सजा को पांच साल से घटाकर तीन साल कैद कर दिया। साथ ही कोर्ट ने माना कि आरोपी का इरादा हत्या करने का नहीं था, इसलिए सजा को आईपीसी की धारा 307 से बदलकर धारा 324 के तहत संशोधित किया गया। कोर्ट ने जुर्माने की राशि बरकरार रखी है।
मजदूरों की नींद और शारीरिक श्रम का महत्व
फैसले में जस्टिस यादव ने यह भी रेखांकित किया कि दिनभर की मेहनत के बाद मजदूरों को रात में अच्छी नींद की जरूरत होती है। यह नींद उन्हें अगले दिन काम के लिए तरोताजा करती है। इसलिए किसी मजदूर की नींद में खलल डालना और उस पर हमला करना अत्यंत निंदनीय है।
पश्चिमी देशों की तुलना में भारत में मजदूरों की स्थिति
कोर्ट ने पश्चिमी देशों की मिसाल देते हुए कहा कि वहां शारीरिक मेहनत करने वालों को उचित वेतन और सम्मान मिलता है। वहीं भारत में मजदूर वर्ग को सामाजिक और आर्थिक दोनों ही दृष्टि से उपेक्षा झेलनी पड़ती है। यह स्थिति सुधार की मांग करती है ताकि मजदूरों को न्याय और सम्मान मिल सके।
शारीरिक श्रम की कद्र और मजदूरों के अधिकारों की सुरक्षा
मजदूरों को मिलने वाले कम वेतन और सम्मान की कमी की समस्या को हल करना जरूरी है। इसके लिए कानून व्यवस्था के साथ-साथ समाज को भी अपनी सोच बदलनी होगी। मजदूरों के अधिकारों की रक्षा कर उनके सम्मान को बढ़ावा देना समाज की जिम्मेदारी है।



