कोलकाता। पश्चिम बंगाल के पूर्व मंत्री और विधानसभा के पूर्व उपाध्यक्ष आशीष बनर्जी की मौत ने राज्य की राजनीति को झकझोर दिया है। रामपुरहाट में पार्टी कार्यालय से उनका शव मिलने के बाद तृणमूल कांग्रेस प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गहरा दुख जताया। उन्होंने आरोप लगाया कि आशीष बनर्जी को लगातार बदनाम किया गया, उन पर झूठे आरोप लगाए गए और आखिरी दिनों में उन्हें जबरदस्त मानसिक दबाव का सामना करना पड़ा।
ममता बनर्जी ने कहा कि यह घटना सिर्फ एक राजनीतिक कार्यकर्ता की मौत नहीं है, बल्कि यह सोचने का समय है कि लगातार राजनीतिक दुश्मनी और दबाव की इंसानी कीमत क्या हो सकती है। उन्होंने आशीष बनर्जी के परिवार के प्रति संवेदना जताते हुए कहा कि उनके साथ जो हुआ, उससे सभी को ठहरकर आत्ममंथन करना चाहिए।
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बार-बार बदनाम किया गया
ममता बनर्जी ने अपने शोक संदेश में कहा कि आशीष बनर्जी को बार-बार बदनाम किया गया और उन पर झूठे आरोप लगाए गए। उनके मुताबिक, इन आरोपों और लगातार दबाव ने आशीष के जीवन के आखिरी दिनों को बेहद मुश्किल बना दिया था। ममता ने इसे राजनीतिक विरोध की उस स्थिति से जोड़कर देखा, जहां किसी व्यक्ति पर लगातार मानसिक दबाव बनाया जाता है। उन्होंने कहा कि आशीष को जिस तरह के उत्पीड़न और मानसिक दबाव से गुजरना पड़ा, उससे समाज और राजनीति दोनों को सीख लेने की जरूरत है। ममता ने इस घटना को ‘मानवीय कीमत’ के नजरिए से देखने की अपील की है।
टीएमसी के वरिष्ठ नेता थे आशीष बनर्जी
आशीष बनर्जी तृणमूल कांग्रेस के पुराने और वरिष्ठ नेताओं में शामिल थे। वह रामपुरहाट विधानसभा सीट से पांच बार विधायक चुने गए। ममता बनर्जी की सरकार में उन्होंने कई विभागों की जिम्मेदारी संभाली और बाद में पश्चिम बंगाल विधानसभा के उपाध्यक्ष भी रहे। 2026 के विधानसभा चुनाव में भी उन्होंने रामपुरहाट से टीएमसी के टिकट पर चुनाव लड़ा था, लेकिन भाजपा के ध्रुव साहा से हार गए। चुनावी हार के बाद उन्होंने पार्टी संगठन में अपनी सक्रिय भूमिका कम कर दी थी और जून में बीरभूम जिला तृणमूल के चेयरमैन पद से इस्तीफा दे दिया था।
पार्टी कार्यालय में मिला था शव
रविवार सुबह रामपुरहाट में उनके घर से सटे पार्टी कार्यालय से आशीष बनर्जी का शव बरामद हुआ। पुलिस के मुताबिक उनका शव फंदे से लटका मिला। घटनास्थल से एक हस्तलिखित पत्र भी बरामद हुआ, जिसे शुरुआती तौर पर सुसाइड नोट माना जा रहा है। मौत की परिस्थितियों की जांच जारी है और पोस्टमार्टम के बाद तस्वीर और साफ होने की उम्मीद है। रिपोर्टों के मुताबिक आशीष बनर्जी 74 वर्ष के थे। उनकी मौत से कुछ घंटे पहले तक वह अपने छोटे भाई के साथ सामान्य बातचीत कर रहे थे। इसके बाद सुबह उनका शव पार्टी कार्यालय में मिला।
घटनास्थल से मिले पत्र में कई बातें
मामले को और गंभीर बनाने वाला पहलू घटनास्थल से मिला पत्र है। रिपोर्टों के मुताबिक इसमें आशीष बनर्जी ने भ्रष्टाचार के आरोपों से खुद को अलग बताया और कहा कि उन्होंने जीवन में किसी से पैसे नहीं लिए। उन्होंने राजनीतिक जीवन में आने को अपनी बड़ी गलती भी बताया और परिवार की अगली पीढ़ी को राजनीति से दूर रहने की सलाह दी। हालांकि, पत्र की वास्तविकता, उसके लेखक और उसमें लिखी बातों की परिस्थितियों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। इसलिए फिलहाल पत्र में लगाए गए आरोपों को अंतिम तथ्य के तौर पर देखना उचित नहीं होगा।
अभिषेक बनर्जी ने भी उठाए सवाल
टीएमसी के महासचिव अभिषेक बनर्जी ने भी आशीष बनर्जी की मौत पर दुख जताते हुए परिस्थितियों को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मीडिया और भाजपा की ओर से चलाए गए कथित बदनाम करने वाले अभियान ने आशीष बनर्जी पर दबाव बढ़ाया। इस बीच विपक्ष की ओर से भी मामले की जांच को लेकर अलग-अलग सवाल उठ रहे हैं। भाजपा नेता अग्निमित्रा पाल ने कहा कि यह स्पष्ट होना चाहिए कि मामला आत्महत्या का है या हत्या का और जांच से ही सच्चाई सामने आएगी।



