इंदौर। लोकायुक्त पुलिस ने बुधवार सुबह-सुबह महिला एवं बाल विकास विभाग के संयुक्त संचालक लक्ष्मी नारायण कंडवाल के ठिकानों पर छापा मारा। जांच में करीब साढ़े नौ करोड़ की संपत्ति मिली जो उनकी आय से काफी ज्यादा है।
लोकायुक्त एसपी राजेश सहाय को मिली गोपनीय शिकायत के बाद मामले की जांच कराई गई थी। जांच में आय से अधिक संपत्ति होने के तथ्य सामने आने पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज किया गया। इसके बाद विशेष न्यायालय से तलाशी वारंट लेकर बुधवार सुबह छापे की कार्रवाई शुरू की गई। मकान, जिम और एक डिपार्टमेंटल स्टोर पर टीमों ने छापा मारकर कथित काली कमाई से जुटाई गई संपत्ति का पता लगाया। कंडवाल के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण (संशोधन) अधिनियम, 2018 की धारा 13(1)(बी) एवं 13(2) के अंतर्गत अपराध दर्ज किया गया है।लक्ष्मीनारायण कंडवाल महिला एवं बाल विकास विभाग में संयुक्त संचालक के पद पर वर्ष 1996 से पदस्थ हैं।
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आवास, जिम और डिपार्टमेंटल स्टोर
बुधवार सुबह करीब 6 से 7 बजे के बीच लोकायुक्त की अलग-अलग टीमों ने एक साथ आवास, जिम और डिपार्टमेंटल स्टोर पर दबिश दी। कार्रवाई इतनी गोपनीय रखी गई थी कि संबंधित पक्ष को इसकी भनक तक नहीं लग सकी। कार्रवाई के दौरान दस्तावेजों, संपत्तियों और निवेश से जुड़े रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं।

जांच के दौरान संपत्ति देख हैरान टीम
लोकायुक्त की कार्रवाई के दौरान कई ऐसे तथ्य सामने आए, जिन्होंने जांच टीम को भी हैरान कर दिया। लोकायुक्त पुलिस ने जिन प्रतिष्ठानों पर छापा मारा, उनमें एक अत्याधुनिक जिम सेंटर और बड़ा डिपार्टमेंटल स्टोर भी शामिल है। कंडवाल से जुड़े एमएस जिम सेंटर का संचालन दो मंजिला भवन में किया जा रहा है। जिम में आधुनिक फिटनेस उपकरण, महंगी एक्सरसाइज मशीनें और अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं। जिम का आकार और वहां मौजूद संसाधन देखकर जांच अधिकारियों ने भी आश्चर्य जताया। बताया जा रहा है कि यह जिम शहर के बड़े निजी फिटनेस सेंटरों की श्रेणी में गिना जाता है। इसी तरह लोकायुक्त टीम ने जिस डिपार्टमेंटल स्टोर में जांच की, वह भी बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में शामिल बताया जा रहा है। स्टोर में रोजमर्रा की जरूरतों से लेकर विभिन्न उपभोक्ता वस्तुओं का व्यापक कारोबार संचालित होने की जानकारी सामने आई है।

वेतन से 241 प्रतिशत अधिक संपत्ति
लोकायुक्त के अनुसार अधिकारी को अब तक के अपने सेवाकाल में वेतन से ढाई करोड़ रुपये प्राप्त हुए, लेकिन छापे में साढ़े नौ करोड़ रुपये की संपत्ति मिली है। उन्होंने अपनी आय से 241 प्रतिशत अधिक संपत्ति अर्जित की है। छापे में स्कीम-103 में एक तीन मंजिला मकान और एक व्यावसायिक परिसर मिला। इसके अलावा स्कीम-140 में 10 हजार वर्गफीट के प्लॉट भी मिले। 30 वर्षों के सेवाकाल में वे अलग-अलग जिलों में पदस्थ रहे। फिलहाल वे इंदौर में पदस्थ थे।
2.5 करोड़ की आय, 9.5 करोड़ की संपत्ति
लोकायुक्त जांच के अनुसार
सेवा अवधि: लगभग 30 साल (1996 से पदस्थ)
वेतन से प्राप्त कुल आय: करीब 2.5 करोड़ रुपए
सत्यापित संपत्ति: करीब 9.5 करोड़ रुपए
अनुपातहीन संपत्ति: 241 प्रतिशत
क्या-क्या मिली संपत्ति
-स्कीम नंबर-103 में 252 वर्गमीटर के व्यावसायिक भूखंड पर लगभग 13,500 वर्गफीट का बहुमंजिला निर्माण, जिसमें व्यावसायिक परिसर और आलीशान आवास शामिल हैं।
-स्कीम नंबर-140 में लगभग 1000-1000 वर्गफीट के दो प्लॉट।
-पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र से लगे तारपुरा, बेकलाय, बनेड़िया सहित ग्रामीण क्षेत्रों में 11 मूल्यवान भूखंड।



