अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनाव के बीच एक बड़ी कूटनीतिक सफलता सामने आई है। दोनों देशों के बीच समझौते की घोषणा होते ही वैश्विक ऊर्जा बाजार में जबरदस्त हलचल देखने को मिली और तेल की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई।
एशियाई बाजारों में कारोबार शुरू होते ही ग्लोबल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 3.8 फीसदी टूटकर 84.02 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई। वहीं, अमेरिकी क्रूड ऑयल भी 4.1 फीसदी गिरकर 81.40 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।
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इस गिरावट के पीछे सबसे बड़ा कारण अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का वह बयान माना जा रहा है, जिसमें उन्होंने कहा कि समझौते के तहत दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री तेल मार्गों में से एक, होर्मुज स्ट्रेट (Hormuz Strait), को फिर से खोल दिया जाएगा।

ट्रंप ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए कहा, “क्षेत्र में तेल की निर्बाध आवाजाही एक बार फिर शुरू होगी।” इस बयान के बाद निवेशकों और ऊर्जा बाजारों ने राहत की सांस ली, जिसका सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर दिखाई दिया।

उधर, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने जानकारी दी कि इस ऐतिहासिक समझौते पर आधिकारिक हस्ताक्षर 19 जून को स्विट्जरलैंड में किए जाएंगे। माना जा रहा है कि यह समझौता मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।
गौरतलब है कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर हवाई हमले शुरू किए जाने के बाद होर्मुज स्ट्रेट प्रभावी रूप से बंद हो गया था। इसके चलते वैश्विक तेल आपूर्ति को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा हो गई थीं।
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। वैश्विक स्तर पर लगभग 20 प्रतिशत कच्चा तेल और लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) इसी समुद्री मार्ग से होकर गुजरती है। यही वजह है कि इस मार्ग में किसी भी तरह की बाधा का असर सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजारों और ईंधन कीमतों पर पड़ता है।
संघर्ष शुरू होने से पहले ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 70 डॉलर प्रति बैरल थी, लेकिन युद्ध और बढ़ते तनाव के बीच यह कीमत 120 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई थी। अब अमेरिका-ईरान समझौते और होर्मुज़ स्ट्रेट के दोबारा खुलने की खबर ने बाजार की दिशा बदल दी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समझौता सफलतापूर्वक लागू हो जाता है, तो आने वाले दिनों में वैश्विक तेल बाजार में और स्थिरता देखने को मिल सकती है तथा पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर भी इसका सकारात्मक असर पड़ सकता है।



