मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर होंगे बांग्लादेश के 23वें राष्ट्रपति, सीधे मुकाबले में जीता चुनाव

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ढाका। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनप) के वरिष्ठ नेता और पार्टी के लंबे समय तक महासचिव रहे मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर देश के 23वें राष्ट्रपति निर्वाचित हुए हैं। राष्ट्रीय संसद में हुए राष्ट्रपति चुनाव में उन्होंने विपक्षी उम्मीदवार और लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (एलडीपी) के नेता सेवानिवृत्त कर्नल ओली अहमद को बड़े अंतर से हराया। आलमगीर को 255 वोट मिले, जबकि ओली अहमद के पक्ष में 88 सांसदों ने मतदान किया।

ओली अहमद से था सीधा मुकाबला

राष्ट्रपति चुनाव में मिर्जा फखरुल का मुकाबला 11 दलीय विपक्षी गठबंधन और नेशनल सिटीजन पार्टी (एनसीपी) के संयुक्त उम्मीदवार ओली अहमद से था। मिर्जा फखरुल को कुल 255 वोट मिले, जबकि ओली अहमद  को केवल 88 वोट ही मिले। मुख्य चुनाव आयुक्त एएसएम नासिर उद्दीन की देखरेख में दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक मतदान की प्रक्रिया संपन्न हुई, जिसके बाद उन्होंने नतीजों की आधिकारिक घोषणा की।

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35 साल बाद दिखा ऐसा मुकाबला

बांग्लादेश के राजनीतिक इतिहास में यह चुनाव बेहद खास माना जा रहा है। पिछले 35 वर्षों में यह पहला मौका था जब देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद के लिए एक से अधिक उम्मीदवार मैदान में थे। इससे पहले के चुनावों में विपक्षी दलों द्वारा उम्मीदवार न उतारने के कारण चुनाव एकतरफा ही होते रहे थे।

नामांकन से पहले छोड़ा था पार्टी पद

बीएनपी की राष्ट्रीय स्थाई समिति की बैठक के बाद वरिष्ठ संयुक्त महासचिव रूहूल कबीर रिजवी ने उनके नाम का ऐलान किया था। प्रधानमंत्री और बीएनपी अध्यक्ष तारिक रहमान से विचार-विमर्श के बाद यह फैसला लिया गया था। राष्ट्रपति चुनाव लड़ने के लिए आलमगीर ने पार्टी के महासचिव और राष्ट्रीय स्थाई समिति के सदस्य पद से इस्तीफा दे दिया था।

शहाबुद्दीन ने अचानक दिया था इस्तीफा

यह चुनाव पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन के अचानक इस्तीफे के कारण हुआ। 76 वर्षीय शहाबुद्दीन ने गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का हवाला देते हुए अपने पद से त्यागपत्र दे दिया था। उनके इस्तीफे के बाद संविधान के अनुच्छेद 54 के तहत जातीय संसद के अध्यक्ष और कार्यवाहक राष्ट्रपति मेजर (रिटायर्ड) हाफिज उद्दीन अहमद ने अंतरिम जिम्मेदारी संभाली थी। संविधान के तहत 90 दिनों के भीतर नया राष्ट्रपति चुनना अनिवार्य था, जिसे तय सीमा के भीतर पूरा कर लिया गया है।

शिक्षक से राजनीति के शीर्ष तक का सफर

78 वर्षीय मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर का राजनीतिक सफर लंबा रहा है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत शिक्षक के रूप में की थी और बाद में सक्रिय राजनीति में आए। 1980 के दशक के अंतिम वर्षों में उन्होंने स्थानीय राजनीति में कदम रखा और आगे चलकर बीएनपी में शामिल हुए। 2001 के आम चुनाव में वह ठाकुरगांव-1 सीट से सांसद चुने गए तथा बीएनपी सरकार में विभिन्न जिम्मेदारियां संभालीं। विपक्ष में रहते हुए भी वह बीएनपी के केंद्रीय नेतृत्व में लगातार सक्रिय रहे। खासकर खालिदा जिया के कारावास और तारिक रहमान के विदेश में रहने के दौरान पार्टी के संगठन और राजनीतिक गतिविधियों को संभालने में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही।

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