अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान में जारी तनाव को रोकने की घोषणा के साथ कई अहम बयान दिए हैं, जिनकी चर्चा वैश्विक राजनीति में तेजी से हो रही है। उनके इन बयानों को पश्चिम एशिया और दुनिया के अन्य हिस्सों में अमेरिका की बदलती नीति के संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है।
ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ उनके रिश्ते अब बहुत अच्छे हैं। 40 दिनों से अधिक समय तक चले संघर्ष के बाद आई यह टिप्पणी कई लोगों को उनके रुख में बदलाव या यू-टर्न जैसी लग रही है। इससे पहले दोनों देशों के बीच संबंध काफी तनावपूर्ण रहे थे।
भारत-अमेरिका संबंधों पर बात करते हुए ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना “दोस्त” बताया। उन्होंने कहा कि हाल ही में फोन पर उनकी बातचीत बेहद अच्छी रही। इस बातचीत की पुष्टि खुद प्रधानमंत्री मोदी ने भी की थी। दोनों नेताओं के बीच पश्चिम एशिया की स्थिति और समुद्री सुरक्षा जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा हुई।
खास तौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य को खुला और सुरक्षित बनाए रखने पर जोर दिया गया, जो वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने भी इस बातचीत को सकारात्मक और उपयोगी बताया।
ट्रंप ने एक और बड़ा संकेत देते हुए कहा कि अगर ईरान के साथ कोई समझौता होता है, तो वह उस पर हस्ताक्षर करने के लिए पाकिस्तान जाने पर भी विचार कर सकते हैं। यह बयान भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है।
इसके अलावा, ट्रंप ने इजराइल और लेबनान के बीच हुए युद्धविराम को लेकर भी अपनी भूमिका का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि उन्होंने लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ आउन और इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से बातचीत की थी।
ट्रंप ने दावा किया कि अपने दूसरे कार्यकाल में वह अब तक 10वां युद्ध रोकने में सफल रहे हैं। उनके इस बयान को उनकी कूटनीतिक उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है, हालांकि इस पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।


