लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने वाला महिला आरक्षण अधिनियम 2023 गुरुवार से लागू हो गया है। इसके साथ ही अधिसूचना जारी होने के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी तेज हो गई हैं। बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने इस मुद्दे पर अपनी बात रखते हुए भाजपा, कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पर कड़ा हमला बोला है।
मायावती ने अपने सोशल मीडिया संदेश में कहा कि अनुसूचित जाति, जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के संवैधानिक अधिकारों के मामले में कांग्रेस का रवैया हमेशा बदलता रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब कांग्रेस केंद्र की सत्ता में थी, तब उसने इन वर्गों के आरक्षण को पूरी तरह लागू कराने की कोई ठोस पहल नहीं की।
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उन्होंने यह भी कहा कि मंडल आयोग की सिफारिशों के अनुसार अन्य पिछड़ा वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण लागू करने का श्रेय भी बहुजन समाज पार्टी के प्रयासों और पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिंह की सरकार को जाता है।
समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए मायावती ने कहा कि उत्तर प्रदेश में पिछड़े मुस्लिमों को आरक्षण का लाभ देने के लिए 1994 में आई रिपोर्ट को उस समय की सरकार ने लागू नहीं किया था, जबकि उनकी पार्टी की सरकार ने 1995 में आते ही इसे लागू कर दिया था। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा सत्ता में रहते समय और विपक्ष में रहते समय अलग-अलग रवैया अपनाती है।
मायावती ने कहा कि महिला आरक्षण को लागू करने के लिए 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन की बात हो रही है, तो यदि इसे जल्दी लागू करना है तो इसी आधार को स्वीकार करना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कांग्रेस आज सत्ता में होती, तो वह भी भाजपा की तरह ही यही कदम उठाती।
उन्होंने निष्कर्ष रूप में कहा कि अनुसूचित जाति, जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और मुस्लिम समाज के वास्तविक हितों को लेकर कोई भी राजनीतिक दल गंभीर नहीं रहा है। उन्होंने इन वर्गों से अपील की कि जो भी आरक्षण अभी मिल रहा है, उसे स्वीकार करें और किसी के बहकावे में न आएं।
अंत में मायावती ने सलाह दी कि इन वर्गों को आत्मनिर्भर बनकर अपने समाज को मजबूत करना चाहिए, तभी उनका भविष्य सुरक्षित और बेहतर बन सकेगा।


