पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष विराम पर एक बार फिर खतरे के बादल मंडराने लगे हैं। अमेरिका ने दक्षिणी ईरान में कई ठिकानों पर हमला किया है, जिसके बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है। बताया जा रहा है कि ये हमले उन इलाकों पर किए गए, जहां से होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा को खतरा पैदा हो सकता था।
ईरानी मीडिया के मुताबिक, अमेरिकी सेना ने बंदर अब्बास बंदरगाह के नजदीक हमले किए। ईरान की समाचार एजेंसी ‘फार्स’ ने दावा किया कि गुरुवार तड़के बंदर अब्बास पोर्ट शहर के पूर्वी इलाके में तीन तेज धमाकों की आवाज सुनी गई। इसके तुरंत बाद एयर डिफेंस सिस्टम सक्रिय कर दिए गए और सुरक्षा एजेंसियां धमाकों के स्रोत का पता लगाने में जुट गईं।
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हालांकि शुरुआती रिपोर्ट्स में किसी बड़े नुकसान की पुष्टि नहीं हुई है। अमेरिका पिछले तीन दिनों में दूसरी बार दक्षिणी ईरान पर हमला कर चुका है और खास तौर पर बंदर अब्बास क्षेत्र को निशाना बनाया गया है।
अमेरिका का कहना है कि उसने ये कार्रवाई आत्मरक्षा में की है, जबकि ईरान ने इसे पहले से ही नाज़ुक संघर्ष विराम को तोड़ने वाली कार्रवाई बताया है।
इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भी कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि वह मिडटर्म चुनावों के दबाव में ईरान के साथ किसी समझौते में जल्दबाजी नहीं करेंगे। व्हाइट हाउस में कैबिनेट बैठक के दौरान ट्रंप ने कहा, “अगर बातचीत अमेरिका की शर्तों के मुताबिक नहीं हुई, तो हम फिर सैन्य कार्रवाई करने के लिए तैयार हैं।”
तनाव के बीच कुवैत की सेना ने भी मिसाइल और ड्रोन हमले का दावा किया है। कुवैती सेना के मुताबिक, एयर डिफेंस सिस्टम ने कई मिसाइलों और ड्रोन को हवा में ही मार गिराया, जिससे जोरदार धमाके सुनाई दिए। सरकार ने नागरिकों से सुरक्षा निर्देशों का पालन करने की अपील की है।
वहीं ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) ने कहा है कि अमेरिकी हमलों के जवाब में अमेरिकी एयरबेस को निशाना बनाया गया, हालांकि यह स्पष्ट नहीं किया गया कि हमला किस एयरबेस पर किया गया।


