पश्चिम एशिया के तनावपूर्ण माहौल के बीच अमेरिका ने अपनी सैन्य मौजूदगी और मजबूत कर दी है। अमेरिकी नौसेना का शक्तिशाली विमानवाहक पोत यूएसएस जॉर्ज एच.डब्ल्यू. बुश अब इस क्षेत्र में तैनात कर दिया गया है। इसके पहुंचने के साथ ही इलाके में अमेरिकी युद्धपोतों की संख्या बढ़कर तीन हो गई है।
अमेरिकी सेना के अनुसार, यह कैरियर स्ट्राइक ग्रुप 23 अप्रैल को हिंद महासागर में अपने जिम्मेदारी वाले क्षेत्र में सक्रिय था और अब पश्चिम एशिया में पहुंच चुका है। इस समूह में 6,000 से अधिक नौसैनिक शामिल हैं, जो इसकी ताकत को और बढ़ाते हैं।
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यूएसएस जॉर्ज एच.डब्ल्यू. बुश एक अत्याधुनिक निमित्ज श्रेणी का परमाणु ऊर्जा से संचालित युद्धपोत है। इसमें लगे दो परमाणु रिएक्टर इसे 20 से 25 वर्षों तक बिना ईंधन भरे संचालन की क्षमता देते हैं। इसमें लगभग 90 तक लड़ाकू विमान और हेलिकॉप्टर तैनात किए जा सकते हैं।
इस बीच, अमेरिका और ईरान के बीच संघर्षविराम बढ़ाए जाने के बावजूद तनाव बना हुआ है। इसी संदर्भ में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर सख्त बयान दिया है।
ट्रंप ने कहा कि जब तक ईरान किसी समझौते पर सहमत नहीं होता, तब तक अमेरिका इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर अपना नियंत्रण बनाए रखेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कदम ईरान की अर्थव्यवस्था पर दबाव बनाने के लिए उठाया गया है।
ट्रंप के अनुसार, यदि यह मार्ग खुला रहता है तो ईरान रोजाना करीब 500 मिलियन डॉलर की कमाई कर सकता है, जिसे रोकना फिलहाल अमेरिकी रणनीति का हिस्सा है। उन्होंने यह भी माना कि इसका असर वैश्विक तेल आपूर्ति और कीमतों पर पड़ सकता है, हालांकि उन्होंने भरोसा जताया कि अमेरिकी उत्पादन के चलते स्थिति नियंत्रण में है।
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक है, जो खाड़ी के देशों को वैश्विक बाजार से जोड़ता है। यहां किसी भी तरह की बाधा से अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ जाती है।


