Health Alert India: महिलाओं पर बढ़ रहा बीमारियों का सबसे बड़ा खतरा! NSSO रिपोर्ट में सामने आए चौंकाने वाले आंकड़े

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भारत में बढ़ती बीमारियां अब केवल स्वास्थ्य क्षेत्र की चुनौती नहीं रह गई हैं, बल्कि यह सामाजिक और आर्थिक चिंता का विषय भी बनती जा रही हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय के राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण कार्यालय (NSSO) की ताजा रिपोर्ट ने महिलाओं के स्वास्थ्य को लेकर एक गंभीर तस्वीर पेश की है।

रिपोर्ट के अनुसार, देश में महिलाओं में बीमारियों की दर पुरुषों की तुलना में काफी अधिक दर्ज की गई है। खास तौर पर उच्च रक्तचाप (High Blood Pressure), थायरॉयड विकार (Thyroid Disorders), हड्डी और मांसपेशियों से जुड़ी समस्याएं तथा विभिन्न प्रकार के संक्रमण महिलाओं में अधिक पाए गए हैं।

आंकड़ों के मुताबिक, सर्वेक्षण से पहले के 15 दिनों के भीतर बीमारी दर्ज कराने वालों की संख्या महिलाओं में पुरुषों की तुलना में काफी ज्यादा रही। प्रति एक लाख आबादी पर पुरुषों में 13,504 बीमारी के मामले दर्ज किए गए, जबकि महिलाओं में यह संख्या बढ़कर 17,006 तक पहुंच गई। यह अंतर इस बात का संकेत है कि महिलाओं का स्वास्थ्य तेजी से चिंता का विषय बन रहा है।

हृदय रोगों के मामले भी लगातार बढ़ रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, पुरुषों में हृदय संबंधी बीमारियों के 3,523 मामले दर्ज किए गए, जबकि महिलाओं में यह संख्या 4,273 रही। हालांकि, सीने में दर्द और शारीरिक चोटों से जुड़े मामलों में पुरुषों की संख्या अपेक्षाकृत अधिक पाई गई।

मानसिक स्वास्थ्य को लेकर भी बढ़ी चिंता

रिपोर्ट में मानसिक और न्यूरोलॉजिकल बीमारियों के आंकड़े भी चिंता बढ़ाने वाले हैं। अवसाद (Depression), तनाव (Stress), चिंता (Anxiety) और तंत्रिका तंत्र से जुड़ी कई समस्याएं महिलाओं में पुरुषों की तुलना में अधिक दर्ज की गईं।

मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि घरेलू जिम्मेदारियां, कार्यस्थल का दबाव, परिवार की देखभाल और सामाजिक अपेक्षाओं का संयुक्त प्रभाव महिलाओं के मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर डाल सकता है। यही वजह है कि महिलाओं में तनाव और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं।

कुछ बीमारियों में अंतर नहीं

रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि श्वसन तंत्र (Respiratory Diseases) से जुड़ी बीमारियों में पुरुषों और महिलाओं के बीच बहुत अधिक अंतर नहीं है। सर्दी-जुकाम, गले का संक्रमण और ऊपरी श्वसन तंत्र से जुड़ी समस्याएं दोनों वर्गों में लगभग समान स्तर पर दर्ज की गईं।

विशेषज्ञों का कहना है कि महिलाओं में बढ़ती बीमारियों का असर केवल उनके स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उनकी कार्यक्षमता, आर्थिक भागीदारी और जीवन की गुणवत्ता पर भी सीधा प्रभाव डाल सकता है। ऐसे में नियमित स्वास्थ्य जांच, बेहतर पोषण, मानसिक स्वास्थ्य सहायता और जागरूकता अभियान की जरूरत पहले से कहीं अधिक महसूस की जा रही है।

यह रिपोर्ट एक महत्वपूर्ण संकेत देती है कि महिलाओं के स्वास्थ्य को लेकर नीतिगत स्तर पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है, ताकि बढ़ते रोग भार को समय रहते नियंत्रित किया जा सके।

 आपकी राय क्या है?
क्या भारत में महिलाओं के स्वास्थ्य और मानसिक स्वास्थ्य पर पर्याप्त ध्यान दिया जा रहा है, या अभी भी यह एक अनदेखा मुद्दा बना हुआ है?

कमेंट करके अपनी राय जरूर बताएं। क्या महिलाओं के लिए नियमित हेल्थ स्क्रीनिंग और मानसिक स्वास्थ्य जांच अनिवार्य की जानी चाहिए? 

Abhilash Shukla (Editor)
Abhilash Shukla (Editor)http://www.hbtvnews.com
Abhilash Shukla is an experienced editor with over 28 years in journalism. He is known for delivering balanced, impactful, and credible news coverage.

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