महिला आरक्षण बिल पर गरमाई सियासत, विपक्षी दलों की बैठक में आरक्षण का समर्थन, लेकिन परिसीमन का विरोध, खड़गे ने राजनीति से प्रेरित बताया

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नई दिल्ली। महिला आरक्षण बिल पर सियासत गरम है। पूरा विपक्ष इस मामले में एकजुट होकर इसका विरोध कर रहा है। बुधवार को विपक्षी दलों की बैठक के बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि विपक्षी दल महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन सरकार जिस तरह से इसे लागू करने की योजना बना रही है, वह पूरी तरह से राजनीति से प्रेरित और जनता को गुमराह करने वाला कदम है।

बैठक के बाद खड़गे ने कहा कि हम सभी महिला आरक्षण बिल के पक्ष में हैं, लेकिन सरकार जिस तरह से इसे लेकर आई है, वह राजनीति से प्रेरित है। हमने हमेशा इस बिल का समर्थन किया है, लेकिन हमारा आग्रह है कि पुराने संशोधनों को लागू किया जाए। सरकार परिसीमन और जनगणना के नाम पर चालें चल रही है। कार्यपालिका के जरिए संविधान की उन शक्तियों को हथिया रही है जो संसद और संस्थाओं के पास होनी चाहिए। इन्होंने पहले भी असम और जम्मू-कश्मीर के परिसीमन में हमें धोखा दिया है। इसलिए हम इस बिल के मौजूदा स्वरूप का एकजुट होकर संसद में विरोध करेंगे।

जयराम रमेश ने कहा-परिसीमन के खिलाफ

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि महिला आरक्षण को तुरंत लागू किया जाना चाहिए और हम इसके समर्थन में हैं, लेकिन हम इस बिल के साथ जोड़ी गई परिसीमन की प्रक्रिया के पूरी तरह खिलाफ हैं। उन्होंने कहा कि आरक्षण को परिसीमन और जनगणना की शर्तों में उलझाना सरकार की एक सोची-समझी चाल है, जिससे इस अधिकार को लंबे समय तक टाला जा सके। इसलिए विपक्ष महिलाओं को हक देने का तो पक्षधर है लेकिन सरकार के इस तरीके का पुरजोर विरोध करता है।

आखिर क्यों हो रहा बिल का विरोध

नारी शक्ति वंदन अधिनियम का मुख्य उद्देश्य लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित करना है, जिससे राजनीति में उनकी भागीदारी बढ़ सके। सरकार ने इस बिल के लागू होने के लिए दो बड़ी शर्तें जोड़ दी हैं। पहली यह कि पहले देश में नई जनगणना होगी और दूसरी यह कि उसके आधार पर सीटों का नया परिसीमन किया जाएगा। विपक्ष का कहना है कि इन पेचीदा शर्तों के कारण यह कानून अगले कई वर्षों तक जमीन पर नहीं उतर पाएगा, जिससे महिलाओं को मिलने वाला अधिकार लंबे वक्त के लिए टल गया है।

अधिकांश विपक्षी नेता हुए शामिल

महिला आरक्षण को लागू करने को लेकर बुधवार को बुलाई गई विपक्षी नेताओं की बैठक में अधिकांश दलों ने हिस्सा लिया। यह बैठक कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर हुई, जिसमें विपक्षी नेता राहुल गांधी, आरजेडी नेता तेजस्वी यादव, शिवसेना सुप्रीमो उद्धव ठाकरे, संजय राउत, टीआर बालू, एनी राजा सुप्रिया सुले सहित कई नेता शामिल हुए। बैठक में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और सीपीएमएल महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य वर्चुअली जुड़े, जबकि आम आदमी पार्टी ने महिला आरक्षण संशोधन पर विपक्ष के साझा रुख का समर्थन करने का संकेत दिया। शिरोमणि अकाली दल ने भी महिला आरक्षण के साथ परिसीमन को जोड़ने का विरोध किया है. पार्टी अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने कहा कि उनकी पार्टी महिला आरक्षण का समर्थन करती है, लेकिन जनसंख्या के आधार पर लोकसभा सीटों के परिसीमन का विरोध करती है।

Harish Fatehchandani
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Harish Fatehchandani is a dedicated journalist with over a decade of experience in the media field. He is respected for his consistent and honest reporting.

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कोलकाता। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कल राष्ट्र के नाम संबोधन में महिला आरक्षण बिल को लेकर कांग्रेस और टीएमसी पर निशाना साधा था। आज यानी रविवार को भी पीएम मोदी ने बंगाल में फिर से टीएमसी को आड़े हाथों लिया है। इस पर अब पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने पलटवार करते हुए कहा है कि महिला आरक्षण के नाम पर पीएम मोदी देश को भ्रमित कर रहे हैं। ममता बनर्जी ने एक्स पर एक पोस्ट के जरिये अपनी बात रखते हुए आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री ने देश को सच्चाई बताने के बजाय भ्रमित करने का प्रयास किया है। उन्होंने लिखा कि महिला आरक्षण के नाम पर सियासी खेल नहीं चलेगा। ममता बनर्जी ने स्पष्ट कहा कि तृणमूल कांग्रेस हमेशा से महिलाओं के राजनीतिक प्रतिनिधित्व की पक्षधर रही है और इस मुद्दे पर उसकी प्रतिबद्धता पर सवाल उठाना गलत है। ममता बनर्जी ने आंकड़ों के जरिये बताया कि लोकसभा में तृणमूल के 37.9 प्रतिशत सांसद महिलाएं हैं, जबकि राज्यसभा में 46 प्रतिशत महिलाओं को नामित किया गया है। उनके मुताबिक, महिला आरक्षण का विरोध करने का सवाल ही नहीं उठता। ममता ने  कहा कि महिला आरक्षण के नाम पर सरकार अपनी राजनीतिक मंशा पूरी करना चाहती है। यह संविधान के मूल ढांचे से छेड़छाड़ और संघीय व्यवस्था पर हमला है, जिसके जरिये भाजपा शासित राज्यों को फायदा पहुंचाने की कोशिश हो रही है। 2023 में बिल पास होने का किया जिक्र ममता बनर्जी ने सवाल उठाया कि अगर सरकार इस मुद्दे पर गंभीर थी, तो 28 सितंबर 2023 को बिल पास होने के बाद करीब तीन साल तक इसे लागू क्यों नहीं किया गया। चुनाव के बीच इसे जल्दबाजी में आगे बढ़ाना और डिलिमिटेशन से जोड़ना सरकार की नीयत पर सवाल खड़ा करता है। प्रधानमंत्री पर निशाना साधते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि उन्हें संसद के भीतर आकर देश को संबोधित करना चाहिए, जहां जवाबदेही तय होती है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में पारदर्शिता जरूरी है और जनता सच्चाई को समझती है। ममता ने आगे कहा कि आपने कल जो किया वह कायरतापूर्ण, पाखंडी और दोहरी चाल थी। आप महसूस कर सकते हैं कि सत्ता आपके हाथों से फिसल रही है।