इंदौर। बकौल मध्यप्रदेश के काबीना मंत्री कैलाश विजयवर्गीय-शिवराज सिंह चौहान जब हरियाणा के प्रभारी थे तो भाजपा मात्र चार सीटें जीत पाई थी। जब कैलाशजी स्वयं प्रभारी बने तो हरियाणा में सरकार बनवा दी। आप की बात सोलह आने सच है, लेकिन आपके कार्यकर्ता इस पर कई सवाल उठा रहे हैं। आपके कार्यकर्ता ही यह कह रहे हैं कि चार सीटें जिताने वाले शिवराज को पार्टी ने क्या कुछ नहीं दिया, लेकिन आपको राष्ट्रीय से फिर स्थानीय बना दिया।
आपने ही रविवार को विधानसभा एक में आयोजित दीपावली मिलन समारोह में खुलकर अपने मन की बात रखी। आपने कहा कि जब आपको हरियाणा का प्रभारी बनाया गया। तब तीन हजार इंदौर के कार्यकर्ताओं को ले जाकर पहली बार वहां चुनाव जीते और सरकार भी बनाई, जबकि शिवराज चौहान मात्र 4 सीट ला पाए थे। पार्टी आपका योगदान जानती है, फिर शिवराज सिंह चौहान से बेहतर बताने की जरूरत क्यों पड़ी?
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मन की टीस भी बाहर आई
आपने यह भी कहा कि शिवराजजी के बाद आपको बुलाया गया। तब अमित भाई अध्यक्ष थे। मुझे बोला गया आपको हरियाणा देखना है और आप यहां से घर नहीं जाएंगे, सीधे रोहतक जाएंगे। इसके बाद शाम को आप प्रधानमंत्री से मिलने चले गए। उन्होंने कहा कि हरियाणा थोड़ा चैलेंजिंग है। जाकर वहां काम करो। हरियाणा जितने पर आपने सोचा कि अब बड़ा पुरस्कार मिलेगा, लेकिन आपको बंगाल का प्रभारी बना दिया गया।
कार्यकर्ताओं की उम्मीदों पर क्यों फिर रहा पानी?
आप जब राष्ट्रीय राजनीति से मध्यप्रदेश वापस आए तो आपसे जुड़े नेताओं व कार्यकर्ताओं की उम्मीदें बढ़ गई थीं। यहां तक कहा जाने लगा था कि इस बार प्रदेश की कमान आपको ही मिलेगी। यह बातें हवा में नहीं थी। सचमुच आपने हरियाणा और पश्चिम बंगाल में बहुत मेहनत की। जिस पश्चिम बंगाल में कोई भाजपा का नामलेवा नहीं था, वहां आपने संगठन को खड़ा किया। टीएमसी से काफी संख्या में नेता लेकर भाजपा में आए, यह बात अलग है कि इनमें से कई चुनाव बाद टीएमसी में वापस चले गए। यह भी सच है कि आपकी मेहनत के बाद भी भाजपा वहां सरकार नहीं बना पाई।
आप के कद का प्रदेश में कोई नेता नहीं
ऐसे में कार्यकर्ताओं की उम्मीद बढ़ना स्वाभाविक है। कार्यकर्ता तो यहां तक कह रहे हैं कि इस बार आपको मंत्री तो बना दिया गया, लेकिन इंदौर की कमान खुद मुख्यमंत्री ने अपने पास रख आपकी झांकी में अड़ंगा डालने की कोशिश की है। कहा तो यहां तक जा रहा है कि आपके विभाग के अफसर भी आपको उतनी तवज्जे नहीं दे रहे। आपके मन में भी इसकी टीस तो होगी ही, फिर भी इंदौर के कार्यकर्ता हमेशा आपके साथ रहेंगे। छोड़िए ना मंत्री जी, प्रदेश में कोई ऐसा नेता नहीं है, जिसके पास आपके जैसे कार्यकर्ताओं की फौज हो। आपकी लोकप्रियता का ही आलम है कि आप इंदौर में ही कई नई विधानसभा सीटों को जीतकर हमेशा के लिए भाजपा का बना चुके हैं। यह सब किसी से छुपा नहीं हैं, फिर शिवराज जी से तुलना क्यों करना?


