डेली कॉलेज में अब कोर्ट के फैसलों पर ‘जंग’, एक पक्ष अपनी जीत मान रहा, दूसरा बता रहा भ्रामक प्रचार

Date:

इंदौर। डेली कॉलेज बोर्ड के चुनाव हो चुके हैं। नतीजे भी आ चुके हैं, पदाधिकारी भी चुन लिए गए हैं, लेकिन विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा। अब कोर्ट के फैसलों को लेकर जंग जारी है। सोमवार को ही डेली कॉलेज से जुड़ी दो खबरें सामने आईं। एक में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देकर एक पक्ष अपनी जीत के ढोल पीट रहा है, वहीं दूसरा पक्ष उसे महज भ्रामक प्रचार बता रहा है।

पहला पक्ष : ओल्ड डेलियन्स को अधिकार नहीं

एक पक्ष ने बकायदा प्रेस नोट जारी कर सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले को आधार बनाकर खुशी मना रहा है। इसमें कहा गया है कि आज यानी 1 जून को डेली कॉलेज को सर्वोच्च न्यायालय से एक महत्वपूर्ण कानूनी मजबूती प्राप्त हुई। विक्रम खंडेलवाल द्वारा दायर स्पेशल लीव पिटीशन पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति नरसिम्हा एवं माननीय न्यायमूर्ति अरविंद कुमार  ने स्पष्ट टिप्पणी की है कि डेली कॉलेज में अध्ययन कर चुके एल्युमिनाई अथवा ओल्ड डेलियन्स को संस्था के प्रशासनिक संचालन में प्रत्यक्ष हस्तक्षेप या संचालनात्मक अधिकार प्राप्त नहीं हैं। सुनवाई के दौरान न्यायालय की इस स्पष्ट टिप्पणी के बाद याचिकाकर्ता पक्ष की ओर से स्पेशल लीव पिटीशन वापस लेने का निवेदन किया गया। माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने उक्त निवेदन स्वीकार करते हुए याचिका वापस लेने की अनुमति प्रदान की तथा प्रकरण को निरस्त कर दिया।

काफी महत्वपूर्ण टिप्पणी मान रहा यह पक्ष

इस पक्ष द्वारा कहा गया है कि कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार यह टिप्पणी अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि पिछले कई महीनों से डेली कॉलेज के प्रशासनिक ढांचे, बोर्ड की वैधानिकता तथा संचालन व्यवस्था को लेकर विभिन्न मंचों पर लगातार प्रश्न खड़े किए जा रहे थे। सर्वोच्च न्यायालय की यह स्पष्ट टिप्पणी इस बात को रेखांकित करती है कि किसी भी शैक्षणिक संस्था का संचालन उसके विधिसम्मत संवैधानिक ढांचे और वैधानिक प्रशासनिक तंत्र के अंतर्गत ही संचालित होता है

कमजोर पड़ रहा डेली कॉलेज का विवाद

उल्लेखनीय है कि यह घटनाक्रम ऐसे समय आया है जब हाल ही में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट द्वारा डेली कॉलेज से संबंधित विभिन्न याचिकाएं खारिज की जा चुकी हैं और लोकतांत्रिक चुनाव प्रक्रिया के माध्यम से नया बोर्ड गठित हो चुका है। इसके बाद सर्वोच्च न्यायालय में प्रस्तुत याचिका का भी इसी प्रकार समाप्त होना यह संकेत देता है कि डेली कॉलेज के विरुद्ध खड़ा किया गया कानूनी और नैरेटिव आधारित विवाद लगातार कमजोर पड़ता जा रहा है।

दूसरा पक्ष : डेली कॉलेज मामले में भ्रामक प्रचार

पहले पक्ष के विरोध में दूसरे पक्ष ने भी एक प्रेस नोट जारी किया है। इसमें कहा गया है कि  डेली कॉलेज प्रकरण में सर्वोच्च न्यायालय की कार्यवाही को लेकर जारी “प्रेस विज्ञप्ति” की आड़ में जारी कुछ भ्रामक narratives की सत्यता और मंशाओं पर गंभीर प्रश्न खड़े हो गए हैं। कानूनी जानकारों का कहना है कि न्यायालयीन कार्यवाही को तोड़-मरोड़कर प्रस्तुत कर यह प्रचारित किया जा रहा है कि सर्वोच्च न्यायालय ने डेली कॉलेज प्रबंधन के पक्ष में कोई फैसला दे दिया है, जबकि वास्तविक स्थिति इससे भिन्न है।

याचिकाकर्ता ने स्वेच्चा से वापस ली है याचिका

दूसरे पक्ष ने कहा कि जानकारी के अनुसार, कुछ ओल्ड डेलियन्स द्वारा दायर स्पेशल लीव पिटीशन पर सुनवाई के दौरान माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने प्रकरण को ग्रीष्मावकाश के बाद सुनवाई हेतु सूचीबद्ध करने की पहल की थी। इसी दौरान याचिकाकर्ता पक्ष ने स्वेच्छा से याचिका वापस लेने तथा उपलब्ध वैधानिक उपायों के लिए पुनः माननीय मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने की स्वतंत्रता चाही। माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने केवल उक्त अनुरोध को स्वीकार करते हुए याचिका वापस लेने की अनुमति प्रदान की।

हाईकोर्ट में जल्द ही हो जाएगी सुनवाई

दूसरे पक्ष ने कहा है कि अगर प्रकरण को माननीय सर्वोच्च न्यायालय के ग्रीष्मावकाश के बाद सुनवाई हेतु सूचीबद् किया जाता तो कोई भी कार्यवाही 2 से 3 महीने तक टल जाने की सम्भावना थी जबकि मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय  के समक्ष सुनवाई केवल 15 दिनो में होने की पूर्ण सम्भावना है। दूसरे पक्ष ने कहा है कि कानूनी विशेषज्ञों का स्पष्ट मत है कि याचिका वापस लेने की अनुमति को किसी पक्ष की जीत अथवा हार के रूप में प्रस्तुत करना विधिक दृष्टि से अनुचित है। सर्वोच्च न्यायालय ने प्रकरण के गुण-दोष (merits) पर कोई निर्णय नहीं दिया और न ही किसी विवादित अधिकार अथवा प्रश्न का अंतिम निस्तारण किया।

हाईकोर्ट इंदौर का आदेश आज भी प्रभावी

दूसरे पक्ष ने कहा है कि  डेली कॉलेज से संबंधित एक अन्य महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय, इंदौर खंडपीठ द्वारा पारित वह अंतरिम आदेश आज भी प्रभावी है, जिसके अंतर्गत डेली कॉलेज बोर्ड को महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णय लेने से रोका गया है। उक्त आदेश के कारण बोर्ड की प्रशासनिक एवं नीतिगत शक्तियां न्यायिक परीक्षण के अधीन बनी हुई हैं और उसमें कोई परिवर्तन नहीं हुआ है।

Harish Fatehchandani
Harish Fatehchandanihttp://www.hbtvnews.com
Harish Fatehchandani is a dedicated journalist with over a decade of experience in the media field. He is respected for his consistent and honest reporting.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

Subscribe

spot_imgspot_img

Popular

Recent News
Related

मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा अगले महीने से, इंदौर से होगा 150 इलेक्ट्रिक बसों का संचालन

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 1 जून को मंत्रालय में मध्यप्रदेश यात्री परिवहन एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के संचालक मण्डल की बैठक ली। इसमें बताया गया कि मध्य प्रदेश में जुलाई से मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा शुरू होने जा रही है। पहले चरण में इंदौर से इस सर्विस की शुरुआत होगी, जिसमें 150 इलेक्ट्रिक बसें चलाई जाएंगी।