कोलकाता। पश्चिम बंगाल में सोमवार को मंत्रिमंडल का विस्तार हुआ। 35 विधायकों ने मंत्री पद की शपथ ली। इसमें कई बड़े नाम शामिल हैं, लेकिन चर्चा सिर्फ कलिता माझी की हो रही है। चर्चा इसलिए हो रही है कि कलिता दूसरों के घरों में झाड़ू-पोछा और बर्तन मांज कर अपना जीवन यापन करती रही हैं।
विधायक तक का नहीं देखा था सपना
मंत्री बनने के बाद कलिता माझी ने कहा कि पहले मैं कुछ घरों में काम करती थी, आज पूरे राज्य की जिम्मेदारी मेरे कंधों पर है, उसे भी मैं बखूबी निभाऊंगी। मैं बेहद खुश हूं कि मोदीजी ने मुझे इस मुकाम तक पहुंचाया। मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं विधायक बनूंगी, मंत्री बनना तो बहुत दूर की बात थी। कलिता ने कहा कि वह साल 2014 से भाजपा के लिए काम कर रही हूं।
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पैसे की तंगी ने छुड़वा दी पढ़ाई
कलिता को अपने जीवन में काफी संघर्ष करना पड़ा। आर्थिक तंगी के कारण कलिता माझी को अपनी पढ़ाई बीच में छोड़नी पड़ी थी. अपने परिवार का पालन-पोषण करने के लिए उन्होंने कई घरों में झाड़ू-पोछा और बर्तन धोने का काम किया। इससे मात्र चार हजार रुपए महीने की कमाई होती थी। उनके पति सुब्रत माझी पेशे से प्लंबर हैं और उनका इकलौता बेटा हाल ही में 12वीं की परीक्षा दे चुका है।
काम के बाद पार्टी के लिए निकाला समय
कलिता सुबह दो घरों में चौका-बर्तन का काम निपटाकर शाम को पार्टी के प्रचार में निकल जाती थीं। घर-घर जाकर लोगों की समस्याएं सुनना और उनसे जनसंपर्क बनाना उनकी दिनचर्या बन गया। इसी मेहनत के दम पर उन्होंने नगर संपदिका से लेकर जिला कमेटी तक का सफर तय किया।
2021 के हार के बाद भी नहीं हारीं
भाजपा ने कलिता को 2021 के विधानसभा चुनाव में उन्हें आउसग्राम सीट से मैदान में उतारा था, लेकिन तब उन्हें 11,815 वोटों से हार का सामना करना पड़ा था। इस हार के बाद भी न तो कलिता ने अपना हौसला खोया और न ही पार्टी का उन पर से भरोसा कम हुआ। वह लगातार पांच साल तक जनता के बीच डटी रहीं। इसी का नतीजा रहा कि 2026 के विधानसभा चुनाव में पार्टी ने उन्हें फिर से आउसग्राम सीट से टिकट दिया। इस बार कलिता ने तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार श्यामाप्रसन्न लोहार को 12,535 मतों के भारी अंतर से करारी शिकस्त दी।


