भोपाल। हमेशा विवादों में रहने वाले रतलाम की आलोट सीट से भाजपा विधायक चिंतामणि मालवीय एक बार फिर चर्चा में हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर अपनी ही सरकार की प्रशासनिक व्यवस्था पर कई सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में शक्ति का केंद्र नौकरशाही बन गई है।
प्रशासनिक ढांचे में बदलाव की मांग
मालवीय ने मुख्य सचिव से लेकर कलेक्टर स्तर तक प्रशासनिक ढांचे में बड़े बदलाव और रिस्ट्रक्चरिंग की मांग की है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था अप्रत्यक्ष रूप से कॉर्पोरेट मॉडल में बदल रही है। उन्होंने कहा कि राज्य में कार्यपालिका के पास अत्यधिक शक्तियां केंद्रित हो गई हैं। उनके मुताबिक कानून-व्यवस्था, विकास, आपदा प्रबंधन, भू-प्रबंधन, राजस्व और मजिस्ट्रेट संबंधी अधिकार एक ही अधिकारी के पास होने से शक्ति का संतुलन बिगड़ गया है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर आईएएस अधिकारियों पर कार्रवाई के उदाहरण इतने कम क्यों दिखाई देते हैं।
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कई उदाहरण देकर रखी अपनी बात
मालवीय ने इसके कई उदाहरण भी दिए। उन्होंने कहा कि मालवीय ने कहा कि मंदसौर की महापौर रमा देवी गुर्जर, भाजपा जिला अध्यक्ष और अन्य पदाधिकारी कलेक्टर से मिलने पहुंचे थे। उन्हें करीब एक घंटे तक इंतजार कराया गया। बाद में कलेक्टर ने अपने चैंबर में बुलाने के बजाय बाहर मुलाकात की। उन्होंने दावा किया कि रतलाम जिला पंचायत अध्यक्ष लाला बाई अपने पति के साथ कलेक्टर से मिलने पहुंचीं। घंटों इंतजार के बाद भी मुलाकात नहीं हुई। विरोध में उन्हें कलेक्टर कार्यालय की सीढ़ियों पर बैठकर धरना देना पड़ा। विधायक ने कहा कि भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व गृह मंत्री हिम्मत कोठारी को एक मामले में एफआईआर दर्ज कराने के लिए एसपी कार्यालय में फर्श पर बैठकर धरना देना पड़ा, तब जाकर रिपोर्ट लिखी गई।
अफसरों के भ्रष्टाचार पर भी किया वार
डॉ. मालवीय ने अफसरों के भ्रष्टाचार पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि भोपाल के बुराड़ी घाट क्षेत्र में 2022 में विभिन्न राज्यों के करीब 50 आईएएस और कुछ आईपीएस अधिकारियों ने एक ही दिन में लगभग 11 बीघा जमीन खरीदी थी। उनके मुताबिक करीब 10 महीने बाद उसी क्षेत्र से 3,200 करोड़ रुपए की लागत वाला वेस्टर्न कॉरिडोर रोड निकाला गया। इससे जमीनों की कीमत कई गुना बढ़ गई। उन्होंने यह भी दावा किया कि कुछ पूर्व मुख्य सचिवों और वरिष्ठ अधिकारियों ने भोपाल के लो-डेंसिटी कैचमेंट एरिया में जमीनें खरीदीं, जहां प्रतिबंधों के बावजूद मकान और सड़कें विकसित की गईं।
केंद्र जैसा ढांचा राज्यों में लागू हो
मालवीय ने कहा कि केंद्र सरकार में कैबिनेट सेक्रेटरी के बाद हर विभाग का केवल एक सचिव होता है, जबकि राज्यों में मुख्य सचिव के अलावा कई एडिशनल चीफ सेक्रेटरी और प्रिंसिपल सेक्रेटरी बनाए जाते हैं। उनके अनुसार कई बार एक अधिकारी के पास पांच से सात विभाग होते हैं, जबकि मंत्री के पास एक ही विभाग रहता है। इससे अधिकारियों का प्रभाव बढ़ जाता है और जनप्रतिनिधियों को अपेक्षित महत्व नहीं मिल पाता।
कलेक्टर व्यवस्था ब्रिटिश शासन की देन
मालवीय ने कहा कि अमेरिका समेत कई देशों में कलेक्टर जैसी व्यवस्था नहीं है। भारत में यह व्यवस्था ब्रिटिश शासन की देन है। उन्होंने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में प्रशासनिक ढांचे की समीक्षा और पुनर्गठन पर गंभीर चर्चा की जरूरत है। मालवीय ने कहा कि प्रोटोकॉल सूची में विधायक और महापौर मुख्य सचिव से ऊपर स्थान पर आते हैं, जबकि कलेक्टर उनसे काफी नीचे होते हैं। इसके बावजूद व्यवहारिक व्यवस्था में जनप्रतिनिधियों को अपेक्षित सम्मान नहीं मिलता।


