ईरान युद्ध संकट के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा सोना कम खरीदने और तेल की खपत घटाने की अपील पर समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि चुनाव खत्म होते ही सरकार को अचानक संकट याद आ गया और अब अपनी नाकामी का बोझ जनता पर डाला जा रहा है।
अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर लिखा, “चुनाव खत्म होते ही संकट याद आ गया। सच तो यह है कि देश के लिए सबसे बड़ा संकट खुद भाजपा है। अगर इतनी पाबंदियां लगानी पड़ रही हैं तो फिर पांच खरब डॉलर की अर्थव्यवस्था का सपना कहां गया?”
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उन्होंने कहा कि सरकार के हाथ से पूरी तरह नियंत्रण निकल चुका है। डॉलर लगातार ऊपर जा रहा है और रुपया कमजोर होता जा रहा है। अखिलेश ने तंज कसते हुए कहा कि सोना न खरीदने की सलाह आम जनता को नहीं, भाजपा के भ्रष्ट नेताओं को देनी चाहिए, क्योंकि आम आदमी तो वैसे भी इतना महंगा सोना खरीदने की स्थिति में नहीं है।
अखिलेश यादव ने सवाल उठाया कि सारी पाबंदियां चुनाव के बाद ही क्यों याद आईं। उन्होंने कहा, “चुनाव के दौरान भाजपा नेताओं ने हजारों हवाई यात्राएं कीं, बड़े-बड़े होटलों में रुके और जमकर संसाधनों का इस्तेमाल किया। तब बचत और संकट की याद क्यों नहीं आई?”
उन्होंने कहा कि अगर सरकार प्रचार के लिए दूरसंचार माध्यमों का उपयोग कर सकती थी तो जनता पर ही त्याग का बोझ क्यों डाला जा रहा है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने चेतावनी दी कि इस तरह की अपीलों से बाजार में डर, घबराहट और मंदी का माहौल पैदा होगा। उन्होंने कहा कि सरकार का काम संकट से बाहर निकालना होता है, न कि जनता में भय और अफरातफरी फैलाना।
अखिलेश यादव ने भाजपा की विदेश नीति पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि पारंपरिक गुटनिरपेक्ष नीति से हटकर कुछ देशों के दबाव में चलने का खामियाजा अब देश की जनता भुगत रही है। उन्होंने कहा, “भाजपा विदेश नीति और गृह नीति दोनों में विफल हो चुकी है। यह अपील दरअसल सरकार की असफलता की स्वीकारोक्ति है। वोट मिलते ही भाजपा का असली चेहरा सामने आ गया है।”
उन्होंने कहा कि आर्थिक हालात पर रोने वाली यही सरकार देश को हर मोर्चे पर पीछे धकेल चुकी है।


