पश्चिम बंगाल की राजनीति को झकझोर देने वाले चंद्रनाथ रथ हत्याकांड की जांच अब केंद्रीय जांच ब्यूरो के हाथों में पहुंच गई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्रीय जांच ब्यूरो ने सात सदस्यीय विशेष जांच दल का गठन किया है, जिसकी अगुवाई डीआईजी रैंक का वरिष्ठ अधिकारी करेगा। इस हत्याकांड ने राज्य की राजनीति में पहले ही बड़ा तूफान खड़ा कर दिया था और अब जांच के दौरान कई सनसनीखेज जानकारियां सामने आने लगी हैं।
मृतक चंद्रनाथ रथ पूर्व भारतीय वायुसेना कर्मी थे और लंबे समय से शुभेंदु अधिकारी के बेहद करीबी सहयोगी के रूप में काम कर रहे थे। 6 मई की रात मध्यग्राम के पास अज्ञात हमलावरों ने उन पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसा दी थीं। गंभीर हालत में उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
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इस हत्याकांड में अब तक तीन आरोपियों — मयंक राज मिश्रा, विक्की मौर्य और राज सिंह — को गिरफ्तार किया जा चुका है। जांच एजेंसियों ने मयंक राज मिश्रा और विक्की मौर्य को बिहार के बक्सर से पकड़ा, जबकि राज सिंह को उत्तर प्रदेश के बलिया से हिरासत में लिया गया। 10 मई को मिले अहम सुरागों के आधार पर इनकी गिरफ्तारी हुई थी और बाद में तीनों को औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया गया।
अदालत ने तीनों आरोपियों को 24 मई तक पुलिस हिरासत में भेज दिया है। सरकारी वकील एडवोकेट बिबास चटर्जी ने बताया कि अदालत ने सबूत मिटाने से जुड़ी धाराएं भी मामले में जोड़ने की अनुमति दे दी है। जांच एजेंसियां अब हत्या की साजिश, फंडिंग और संभावित राजनीतिक कनेक्शन समेत कई पहलुओं की गहराई से जांच कर रही हैं।
इस बीच आरोपी राज सिंह को लेकर कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। बताया जा रहा है कि वह खुद को अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा का प्रदेश महासचिव बताता था। जांच में यह भी सामने आया है कि उसके उत्तर प्रदेश के कई प्रभावशाली नेताओं और कथित माफिया तत्वों से संबंध थे।
सूत्रों के अनुसार, राज सिंह की तस्वीरें प्रदेश सरकार के एक मंत्री, गोंडा के एक बड़े नेता, जौनपुर के एक विधायक और कुछ विवादित व्यक्तियों के साथ सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं। वह पहले पार्षद का चुनाव भी लड़ चुका है और बलिया के चिलकहर क्षेत्र से ब्लॉक प्रमुख चुनाव लड़ने की तैयारी में था। इतना ही नहीं, उसके खिलाफ पहले से हत्या का एक मामला भी दर्ज बताया जा रहा है।
इस पूरे घटनाक्रम को लेकर शुभेंदु अधिकारी ने पहले ही बड़ा आरोप लगाया था। उन्होंने इसे सुनियोजित राजनीतिक हत्या करार देते हुए कहा था कि चंद्रनाथ रथ को सिर्फ इसलिए निशाना बनाया गया क्योंकि वे उनके करीबी सहयोगी थे। अधिकारी का दावा था कि हमलावरों ने कई दिनों तक रेकी करने के बाद बेहद करीब से गोली मारकर हत्या को अंजाम दिया।
घटना के बाद राज्य की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए थे। तृणमूल कांग्रेस ने न्यायालय की निगरानी में सीबीआई जांच की मांग की थी, जबकि पश्चिम बंगाल कांग्रेस ने भी स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की आवश्यकता बताई थी।
अब जब मामला सीबीआई के हाथों में पहुंच चुका है, तो माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस हत्याकांड से जुड़े कई बड़े राजनीतिक और आपराधिक चेहरे बेनकाब हो सकते हैं।


