प्रवचन और विवादों से मन भर गया क्या महाराज, कम से कम क्रिकेट जैसे काम तो हमारे नेताओं के लिए छोड़ देते!

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इंदौर। अपने प्रवचनों से ज्यादा विवादों के लिए चर्चा में रहने वाले वृंदावन के संत देवकीनंदन ठाकुर इन दिनों इंदौर में सनातनी क्रिकेट करा रहे हैं। 12 से 15 मार्च तक चलने वाले इस सनातनी प्रीमियर लीग (एसपीएल) में कई राज्यों की टीमों के 150 से ज्यादा खिलाड़ी शामिल हो रहे हैं। 12 मार्च को भूमिपूजन के साथ इसका शुभारंभ हो चुका है।

देवकीनंदन ठाकुर ने यह भी कहा कि प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने के लिए लीग में 31 लाख रुपए से अधिक के पुरस्कार रखे गए हैं, जिससे युवाओं में खेल के प्रति उत्साह और बढ़ेगा। उन्होंने इसे युवाओं को सनातन संस्कृति और खेल भावना से जोड़ने का माध्यम बताया। देवकीनंदन ठाकुर ने कहा कि देश भर के विभिन्न राज्यों से आए 150 से अधिक खिलाड़ियों को इस प्लेटफॉर्म में खेलने का मौका दिया गया है, जो खिलाड़ी सबसे बेहतर परफॉर्म करेंगे, उन्हें कई पुरस्कार से सम्मानित भी किया जाएगा। ठाकुर ने कहा कि युवा क्रिकेट के माध्यम से संस्कृति और सनातन से जुड़ सकेंगे।

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क्या राजनीति में आने की इच्छा है महाराज

देवकीनंदन ठाकुर के इस आयोजन को लेकर लोग यह सवाल उठा रहे हैं कि आखिर संतों और कथा वाचकों को ऐसे आयोजन की जरूरत क्यों पड़ी? पहले ही उनके प्रवचनों में भीड़ संभालें नहीं संभल रही, अब अचानक यह क्रिकेट प्रेम कैसे जाग पड़ा? लोग यह भी सवाल उठा रहे हैं कि महाराज को शायद राजनीति में आना होगा, इसलिए पहले से ही तैयारी कर रहे हैं।

क्या प्रवचनों से नहीं जुड़ पा रहे थे युवा

लोग यह भी सवाल उठा रहे हैं कि महाराज देवकीनंदन ठाकुर ने इसे युवाओं को सनातन से जोड़ने की बात कर रहे हैं, क्या उनके प्रवचनों से युवा नहीं जुड़ पा रहे थे। क्या कथाकारों की वाणी में इतनी ताकत नहीं कि वे युवाओं को धर्म से जोड़ सकें, उन्हें संस्कार सीखा सकें।

कृष्ण-सुदामा ने कहां खेला था क्रिकेट

लोग यह भी सवाल उठा रहे हैं कि जहां तक सनातन की बात है, उसमें क्रिकेट कहां से घुस गया। हां, क्रिकेट की जगह गिल्ली-डंडा या कोई और भारतीय पारंपरिक खेल हो सकता था। वृंदावन के संत से लोग यह भी पूछ रहे हैं कि आखिर कृष्ण-सुदामा ने कहां क्रिकेट खेला था? इसका मतलब साफ है कि आप सनातन के नाम पर सिर्फ भीड़ जुटाना चाहते हैं।

राष्ट्रीय स्वाभिमान मंच को मजबूत करने की कोशिश

लोकसभा चुनाव के दौरान देवकीनंदन ठाकुर ने सनातन धर्म के संरक्षण, वक्फ बोर्ड की तर्ज पर ‘सनातन बोर्ड’ के गठन और कृष्ण जन्मभूमि की मांग को मजबूत करने के लिए ‘राष्ट्रीय स्वाभिमान मंच’ का गठन किया था। उस समय यह चर्चा जोरों पर थी कि इसके माध्यम से ठाकुर राजनीति के मैदान में उतर रहे हैं। सनातनी क्रिकेट को लेकर लोग कह रहे हैं कि कहीं यह राष्ट्रीय स्वाभिमान मंच को मजबूत करने की कवायद तो नहीं।

विवादों से रहा है पुराना नाता

देवकीनंद ठाकुर का विवादों से पुराना नाता रहा है और कई केस भी दर्ज हो चुके हैं। वर्ष 2020 में यूपी के मथुरा में एक पत्रकार की पत्नी ने देवकीनंदन ठाकुर समेत 6 लोगों पर घर में घुसकर मारपीट, गालीगलौज और छेड़छाड़ का केस दर्ज कराया था, जिसमें एससी-एसटी एक्ट भी लगाया गया था। 2024 में वाराणसी में एक कथा के दौरान, उन्होंने भारत विभाजन के लिएजयचंदोंको दोषी ठहराया। इस बयान को लेकर अधिवक्ता ने कोर्ट में आपराधिक मानहानि का केस दायर किया। पिछले साल ही जयपुर में आयोजित भागवत कथा मेंनो तिलकनो एंट्रीके सख्त नियम लागू करने पर वे विवादों में आए। ऐसे अनेक विवाद महाराज के नाम के साथ जुड़े हैं।

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