नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों के सम्मेलन में ईरान ने अमेरिका के खिलाफ तीखा हमला बोला। ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरागची ने सदस्य देशों से एकजुट होने की अपील करते हुए कहा कि अब समय आ गया है जब अमेरिका की धौंस, दबाव और जबरदस्ती की नीतियों को इतिहास के कूड़ेदान में फेंक दिया जाए।
सम्मेलन के दौरान अरागची ने कहा कि बैठक में मौजूद लगभग हर देश किसी न किसी रूप में अमेरिका के दबाव, प्रतिबंधों और शोषण का सामना कर चुका है। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका लंबे समय से अपनी ताकत के बल पर दूसरे देशों को झुकाने की कोशिश करता रहा है, लेकिन अब दुनिया बदल रही है और कई देश उसके खिलाफ खुलकर आवाज उठाने लगे हैं।
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ईरानी विदेश मंत्री ने अमेरिका की तुलना एक घायल जानवर से करते हुए बेहद तीखा बयान दिया। उन्होंने कहा, “इतिहास गवाह है कि जब कोई साम्राज्य कमजोर पड़ने लगता है तो वह अपनी हार टालने के लिए हर सीमा पार कर देता है। एक घायल जानवर अंतिम समय में सबसे ज्यादा हिंसक और बेचैन हो जाता है। इसलिए हमें मिलकर इस दादागिरी का जवाब देना होगा।”
अरागची ने कहा कि मौजूदा समय में ब्रिक्स देश पहले से कहीं अधिक एकजुट दिखाई दे रहे हैं। उनके अनुसार दुनिया में तेजी से बदलते हालात के बीच सदस्य देशों को एक-दूसरे के साथ खड़े रहना होगा और वैश्विक संतुलन बनाए रखने के लिए साझा रणनीति अपनानी होगी।
भारत की अध्यक्षता में आयोजित यह दो दिवसीय बैठक 14 और 15 मई को नई दिल्ली में हुई। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते तनाव और पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच इस सम्मेलन को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दुनिया के कई बड़े देशों की मौजूदगी ने यह संकेत दिया कि अब ब्रिक्स केवल आर्थिक मंच नहीं रहा, बल्कि वैश्विक राजनीतिक और रणनीतिक मुद्दों पर भी प्रभाव डालने लगा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और अमेरिका-ईरान टकराव के बीच यह मंच बातचीत और समाधान का महत्वपूर्ण केंद्र बनकर उभर रहा है।
बैठक के बाद ईरान के विदेश मंत्री ने गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी उच्च स्तरीय मुलाकात की। भारत और ईरान के बीच हुई इस बातचीत को रणनीतिक दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है।
ईरानी दूतावास ने सोशल मीडिया पर इस मुलाकात की जानकारी साझा करते हुए इसे दोनों देशों के संबंधों के लिए एक ऐतिहासिक कदम बताया। माना जा रहा है कि इस मुलाकात में क्षेत्रीय सुरक्षा, व्यापार, ऊर्जा और आपसी सहयोग जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई।



