India-US Trade Deal 2026: कांग्रेस का मोदी सरकार पर बड़ा हमला, ‘ट्रंप को खुश करना बंद करें’! क्या किसानों के हितों पर मंडरा रहा है खतरा?

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भारत-अमेरिका व्यापार समझौते (India-US Trade Deal) को लेकर देश की राजनीति गरमा गई है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि के भारत दौरे के बीच कांग्रेस ने प्रधानमंत्री Narendra Modi और उनकी सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस का दावा है कि प्रस्तावित व्यापार समझौता भारत के हितों के खिलाफ है और इससे देश के किसानों को भारी नुकसान हो सकता है।

कांग्रेस महासचिव Jairam Ramesh ने प्रधानमंत्री मोदी से अपील की है कि वे अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump को खुश करने की राजनीति छोड़ें और भारतीय किसानों तथा घरेलू उद्योगों के हितों को प्राथमिकता दें।

अमेरिकी प्रतिनिधि के दौरे के बीच बढ़ी राजनीतिक हलचल

अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर के भारत दौरे को दोनों देशों के बीच संभावित अंतरिम व्यापार समझौते की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसी बीच कांग्रेस ने इस समझौते पर गंभीर सवाल उठाए हैं और सरकार से किसी भी जल्दबाजी से बचने की सलाह दी है।

कांग्रेस ने मलेशिया का उदाहरण दिया

जयराम रमेश ने कहा कि भारत को मलेशिया से सीख लेनी चाहिए। उनका दावा है कि अमेरिकी न्यायिक फैसलों और बदलती व्यापार नीतियों के कारण कई देशों ने अमेरिका के साथ अपने समझौतों पर पुनर्विचार किया है।

कांग्रेस का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौते केवल राजनीतिक रिश्तों के आधार पर नहीं, बल्कि राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर किए जाने चाहिए।

क्या है पूरा विवाद?

कांग्रेस के अनुसार 6 फरवरी 2026 को भारत और अमेरिका के बीच एक साझा व्यापारिक ढांचे पर सहमति बनी थी। इस प्रस्तावित व्यवस्था के तहत अमेरिका भारतीय निर्यात पर शुल्क में राहत देने पर विचार कर रहा था, जबकि भारत अमेरिकी कृषि और औद्योगिक उत्पादों पर आयात शुल्क में बड़ी कटौती करने के लिए तैयार हुआ था।

पार्टी का दावा है कि भारत ने अमेरिका से बड़े पैमाने पर आयात बढ़ाने की प्रतिबद्धता भी जताई थी। हालांकि कांग्रेस का आरोप है कि बदले में अमेरिका की ओर से भारत को पर्याप्त और कानूनी रूप से सुरक्षित आश्वासन नहीं मिला।

अमेरिकी फैसले के बाद बढ़ी अनिश्चितता

कांग्रेस का कहना है कि अमेरिका में हुए कानूनी और नीतिगत बदलावों के बाद पहले की कई व्यापारिक रियायतों को लेकर स्थिति अस्पष्ट हो गई है। ऐसे में पार्टी का तर्क है कि भारत को बिना ठोस गारंटी के किसी भी व्यापक समझौते पर हस्ताक्षर नहीं करने चाहिए।

किसानों पर असर को लेकर चिंता

जयराम रमेश ने दावा किया कि यदि अमेरिकी कृषि उत्पादों पर शुल्क में बड़ी कटौती की जाती है, तो इसका असर देश के कई राज्यों के किसानों पर पड़ सकता है। उन्होंने विशेष रूप से जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान और महाराष्ट्र के किसानों का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार को कृषि क्षेत्र की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए।

कांग्रेस का आरोप है कि समझौते की वर्तमान रूपरेखा भारत के लिए असंतुलित हो सकती है और इससे घरेलू उत्पादकों को प्रतिस्पर्धा का अतिरिक्त दबाव झेलना पड़ सकता है।

मोदी-ट्रंप संबंधों पर भी उठाए सवाल

कांग्रेस नेता ने प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के रिश्तों को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि भारत को अपने आर्थिक और रणनीतिक फैसले पूरी तरह राष्ट्रीय हितों के आधार पर लेने चाहिए, न कि किसी व्यक्तिगत या राजनीतिक समीकरण के आधार पर।

इस बीच अमेरिका और भारत दोनों की ओर से संकेत मिले हैं कि व्यापार समझौते को लेकर बातचीत जारी है और आने वाले समय में इस दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हो सकती है।

क्या भारत को जल्दबाजी करनी चाहिए?

भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और अमेरिका उसका प्रमुख व्यापारिक साझेदार है। ऐसे में यह समझौता दोनों देशों के लिए अहम माना जा रहा है। लेकिन सवाल यह भी है कि क्या किसी भी व्यापार समझौते में किसानों, छोटे उद्योगों और घरेलू बाजार की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता नहीं मिलनी चाहिए?

आपकी राय क्या है?

क्या भारत को अमेरिका के साथ व्यापार समझौते पर आगे बढ़ना चाहिए, या पहले किसानों और घरेलू उद्योगों के हितों की मजबूत सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए? इस मुद्दे पर आपकी क्या राय है? कमेंट करके जरूर बताएं।

Abhilash Shukla (Editor)
Abhilash Shukla (Editor)http://www.hbtvnews.com
Abhilash Shukla is an experienced editor with over 28 years in journalism. He is known for delivering balanced, impactful, and credible news coverage.

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