आकाश मिसाइल: भारतीय सेना की स्वदेशी रक्षा प्रणाली की अद्वितीय ताकत
सेना ने किया आकाश मिसाइल का सफल परीक्षण, एक साथ चार निशानों को भेदने की है क्षमता ओडिशा के गोपालपुर सीवर्ड फायरिंग रेंज में भारतीय सेना के चेतक कोर के वायु रक्षा योद्धाओं ने दिन और रात के समय लक्ष्य बनाकर, कम ऊंचाई और अधिकतम सीमा पर आकाश मिसाइल से सटीक फायरिंग की। दक्षिण पश्चिमी सेना कमान ने इसे सेना वायु रक्षा कोर की परिचालन तत्परता और अत्याधुनिक क्षमताओं का उत्कृष्ट उदाहरण बताया।
आकाश मिसाइल प्रणाली की खासियत यह है कि यह एक साथ चार निशानों को तबाह करने की ताकत रखती है। इसे आत्मनिर्भर भारत पहल को बढ़ावा देने के उद्देश्य से डीआरडीओ द्वारा स्वदेशी रूप से डिजाइन और विकसित किया गया है।
यह मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली है, जिसे इंटीग्रेटेड गाइडेड मिसाइल डेवलपमेंट प्रोग्राम (आईजीएमडीपी) के तहत विकसित किया गया। इस कार्यक्रम में नाग, अग्नि, त्रिशूल और पृथ्वी बैलिस्टिक मिसाइल का विकास भी शामिल था।
आकाश प्रणाली में लॉन्चर, मिसाइल, नियंत्रण केंद्र, बहुक्रियाशील अग्नि नियंत्रण रडार, डिजिटल ऑटोपायलट, C4I (कमांड, कंट्रोल, कम्युनिकेशन और इंटेलिजेंस) केंद्र और सहायक जमीनी उपकरण शामिल हैं। डीआरडीओ के अनुसार, भारत दुनिया का पहला देश है, जिसके पास आकाश मिसाइल जैसी तकनीक और ताकत है।
भारतीय सेना ने मई 2015 में आकाश मिसाइलों के पहले बैच को शामिल किया था , जबकि पहली आकाश मिसाइल मार्च 2012 में भारतीय वायु सेना को सौंपी गई थी। इसे औपचारिक रूप से जुलाई 2015 में भारतीय वायुसेना में शामिल किया गया।
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