ब्रह्मांड के गहरे रहस्यों को समझने की दिशा में वैज्ञानिकों को एक बड़ी और ऐतिहासिक सफलता मिली है। भारतीय और अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिकों की टीम ने लगभग 19 वर्षों तक लगातार अंतरिक्ष का अध्ययन करने के बाद एक महाविशाल कृष्ण विवर में बेहद दुर्लभ और रहस्यमय प्रकाश चक्र की खोज की है। यह खोज भविष्य में आकाशगंगाओं और कृष्ण विवरों की कार्यप्रणाली को समझने में बड़ी भूमिका निभा सकती है।
वैज्ञानिकों ने “3सी 454.3” नाम की एक अत्यंत चमकीली खगोलीय वस्तु में ऐसा पैटर्न खोजा है, जिसमें उसकी चमक लगभग हर 433 दिनों में एक समान तरीके से बदलती दिखाई देती है। इसका अर्थ यह है कि उस कृष्ण विवर से निकलने वाला प्रकाश निश्चित समय अंतराल पर लगातार बढ़ता और घटता रहता है।
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इस लंबे अध्ययन में भारत के Aryabhatta Research Institute of Observational Sciences के वैज्ञानिकों ने भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है। वैज्ञानिकों ने लगातार 19 वर्षों तक इस खगोलीय पिंड से प्राप्त आंकड़ों का सूक्ष्म अध्ययन किया, जिसके बाद इस अनोखे प्रकाश चक्र का पता चला।
दरअसल, “3सी 454.3” एक विशेष प्रकार की सक्रिय आकाशगंगा है, जिसके केंद्र में अत्यंत विशाल कृष्ण विवर मौजूद है। यह महाकाय कृष्ण विवर अपने आसपास की गैस और धूल को तेजी से निगलता रहता है। इसी प्रक्रिया से भारी मात्रा में ऊर्जा उत्पन्न होती है और आकाशगंगा का केंद्र असाधारण रूप से चमकने लगता है।
वैज्ञानिकों के अनुसार, जब इस सक्रिय केंद्र से निकलने वाली शक्तिशाली ऊर्जा धाराएं पृथ्वी की दिशा में होती हैं, तब ऐसी वस्तु अत्यधिक चमकीली दिखाई देती है। इस नई खोज की सबसे खास बात यह है कि अब तक इस तरह के संकेत अधिकतर केवल विशेष विकिरण तरंगों में ही देखे गए थे, लेकिन पहली बार प्रकाश की चमक में इतना स्पष्ट और नियमित चक्र देखने को मिला है।
वैज्ञानिकों का मानना है कि इस खगोलीय पिंड की रोशनी अरबों वर्षों की यात्रा करके पृथ्वी तक पहुंचती है। इसके केंद्र में मौजूद विशाल कृष्ण विवर का द्रव्यमान करोड़ों सूर्यों के बराबर बताया जा रहा है। इतने विशाल और अत्यधिक सक्रिय कृष्ण विवर में इस प्रकार का नियमित प्रकाश चक्र मिलना विज्ञान जगत के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इस खोज से भविष्य में कृष्ण विवरों के आसपास बनने वाली शक्तिशाली ऊर्जा धाराओं, चुंबकीय क्षेत्रों और ब्रह्मांड के सबसे ऊर्जावान स्रोतों को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिलेगी।



