हरियाणा के दंगल में अरविंद केजरीवाल के आने का क्या होगा असर, भाजपा और कांग्रेस की बढ़ी चिन्ता

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नई दिल्ली। हरियाणा चुनाव के दौरान ही दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल के जेल से बाहर आने के बाद जहां आप उत्साहित है, वहीं भाजपा व कांग्रेस की चिन्ता बढ़ गई है। कांग्रेस से गठबंधन नहीं होने के बाद आप ने सभी 90 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं, इस हिसाब से मुकाबला तगड़ा होने की उम्मीद है। सबसे खास बात यह कि केजरीवाल के चुनावी मैदान संभालने से कांग्रेस व भाजपा के समीकरण कुछ सीटों पर बिगड़ते नजर आ रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि हरियाणा में कांग्रेस और भाजपा के अलावा आप की पकड़ मजबूत मानी जाती है। दिल्ली और पंजाब में आप की सरकार होने के कारण हरियाणा में भी इसके असर से इनकार नहीं किया जा सकता। 2019 में आप ने हरियाणा विधान सभा की 46 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन उसे सफलता नहीं मिली थी। उस समय उसका वोट शेयर महज एक फीसदी रहा था, लेकिन अब हालात काफी बदल गए हैं। जेजेपी और आजाद समाज पार्टी मिलकर चुनाव लड़ रहे हैं, लेकिन फिलहाल उनका असर काफी कम होता दिखाई दे रहा है।

क्या असर डालेंगे केजरीवाल

हरियाणा में टिकट वितरण के दौरान ही भाजपा व कांग्रेस में बगावत नजर आने लगी थी। इस बार कांग्रेस से ज्यादा भाजपा में उठापटक हुई है। कांग्रेस अपने इंडिया अलायंस को मजबूत रखने तथा भाजपा के खिलाफ माहौल बनाने के लिए आप से गठबंधन की लगातार कोशिश करती रही लेकिन कामयाबी नहीं मिली। फिलहाल कांग्रेस ने विनेश फोगाट को टिकट देकर भाजपा के खिलाफ माहौल बनाने की कोशिश की है, लेकिन केजरीवाल के साथ जो कुछ भी हो रहा है वह आप के प्रति लोगों की सहानुभूति बनाने के लिए काफी है। भाजपा के लिए संकट उसके पुराने नेता भी बन रहे हैं। जिन्हें टिकट नहीं दिया है। ऐसे कई नेता भाजपा के ही खिलाफ मैदान में हैं। कांग्रेस को भी गुटबाजी का सामना कर पड़ रहा है। यहां तीन गुट चुनाव मैदान में दिखाई दे रहे हैं। जेजपी और आजाद समाज पार्टी एक साथ राज्य की सभी सीटों पर लड़ रही है। पिछले विधान सभा चुनाव में जेजेपी को 13 फीसदी से ज्यादा वोट मिले थे लेकिन लोक सभा चुनाव में जेजेपी की हिस्सेदारी एक फीसदी से भी नीचे गिर कर 0.87 हो गई थी। ऐसे में सभी पार्टियों को केजरीवाल का डर है। वैसे भी शहरी वोटों पर केजरीवाल की पकड़ अच्छी मानी जाती है। हाल ही में जेल से निकले केजरीवाल सीधे-सीधे भाजपा पर वार करेंगे और निश्चित तौर पर इससे कांग्रेस व अन्य दलों को नुकसान होगा।

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