इंदौर हाईकोर्ट का सख्त आदेश अवैध होर्डिंग मामले में आया है, जिसमें कोर्ट ने निगम को चार हफ्ते के भीतर इस मामले पर फैसला लेने का निर्देश दिया है। यह आदेश इंदौर शहर में अवैध होर्डिंग्स, बैनर तथा विज्ञापनों के बढ़ते मामले को लेकर जारी किया गया है।
हाईकोर्ट ने निगम को 4 हफ्ते में अवैध होर्डिंग पर कार्रवाई का निर्देश दिया
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ ने अवैध होर्डिंग्स के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए नगर निगम को चार सप्ताह के भीतर जवाब देने और कार्रवाई करने के आदेश दिए हैं। न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी की डिवीजन बेंच ने जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान यह निर्देश जारी किया।
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कोर्ट ने निगम कमिश्नर को कहा है कि वे नियमों का उल्लंघन करने वाले होर्डिंग्स की पहचान करें और उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करें। इससे पहले भी कोर्ट ने 24 घंटे के भीतर अवैध होर्डिंग्स हटाने और एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए थे।

इंदौर नगर निगम को दिए गए अंतरिम निर्देश और उनका महत्व
अंतरिम तौर पर निगम को निर्देश दिया गया है कि वे सड़क के डिवाइडर और फुटपाथों पर लगे अवैध होर्डिंग्स की सूची बनाएं और नियमों के अनुसार कदम उठाएं। यह आदेश शहर की सुरक्षा और सौंदर्य दोनों के लिए अहम है।
अवैध होर्डिंग्स के कारण कई बार सड़क दुर्घटनाएं भी हुई हैं। सितंबर 2026 में पाटनीपुरा चौराहे पर गिरा एक बड़ा होर्डिंग एक राहगीर को गंभीर रूप से घायल कर चुका है। इससे स्पष्ट है कि निगम की त्वरित कार्रवाई जरूरी है।
समाजसेवी प्रहलाद पांडेय का अनशन और जन-आंदोलन
अवैध होर्डिंग्स के खिलाफ समाजसेवी प्रहलाद पांडेय और उनकी पत्नी संगीता पांडेय ने रीगल चौराहे पर गांधी प्रतिमा के नीचे नौ दिनों तक भूख हड़ताल की। उनका यह आंदोलन शहर में इस समस्या की गंभीरता को उजागर करता है।
नगर निगम और जिला प्रशासन द्वारा लिखित आश्वासन मिलने के बाद उन्होंने अपना अनशन समाप्त किया। यह आंदोलन निगम और प्रशासन के लिए एक चेतावनी भी माना जा सकता है।
याचिकाकर्ता की मांगें और निगम की जिम्मेदारियां
प्रहलाद पांडेय ने याचिका में मांग की है कि अवैध होर्डिंग्स हटाने का खर्च उन लोगों से वसूला जाए जिन्होंने इन्हें लगाया है। इसके अलावा दोषियों पर एफआईआर दर्ज की जाए और निगम के ‘311 ऐप’ में शिकायत के लिए विशेष विकल्प जोड़ा जाए।
यह कदम न केवल अवैध होर्डिंग्स पर अंकुश लगाएगा, बल्कि शिकायत प्रक्रिया को भी आसान बनाएगा। निगम की जवाबदेही बढ़ेगी और शहर के लोग भी इस प्रक्रिया में भागीदार बनेंगे।
अवैध होर्डिंग से सुरक्षा जोखिम और आम लोगों पर असर
अवैध होर्डिंग्स न केवल शहर की सौंदर्यहीनता बढ़ाते हैं, बल्कि सुरक्षा के लिए भी खतरा हैं। कई बार ये होर्डिंग्स सड़क पर गिरने से दुर्घटनाओं का कारण बनती हैं।
आम नागरिकों की सुरक्षा प्राथमिकता होनी चाहिए। इसलिए, इंदौर हाईकोर्ट का यह आदेश निगम की जिम्मेदारी को स्पष्ट करता है कि वे जल्द से जल्द इस समस्या का समाधान करें।
आगे की कार्रवाई और उम्मीदें
चार हफ्ते की समय-सीमा के भीतर निगम की रिपोर्ट कोर्ट में पेश करनी होगी। इसके बाद कोर्ट आवश्यक निर्देश जारी कर सकता है।
यह कदम इंदौर को अवैध होर्डिंग्स से मुक्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा। यदि निगम प्रभावी कार्रवाई करता है तो शहर के सौंदर्य और सुरक्षा दोनों सुधरेंगे।



