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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू बोत्सवाना पहुंचीं: ऐतिहासिक राजकीय यात्रा, भारत-अफ्रीका संबंधों को नई दिशा
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू अफ्रीका यात्रा के अंतिम चरण में बोत्सवाना की राजधानी गाबोरोन पहुंचीं, जहां उनका 21 तोपों की सलामी और गार्ड ऑफ ऑनर के साथ भव्य स्वागत किया गया। यह किसी भारतीय राष्ट्रपति की बोत्सवाना की पहली राजकीय यात्रा है। बोत्सवाना के राष्ट्रपति डूमा गिडियन बोको ने स्वयं राष्ट्रपति मुर्मू का स्वागत किया।
राष्ट्रपति मुर्मू की यह यात्रा उनके दो अफ्रीकी देशों — अंगोला और बोत्सवाना — के दौरे का हिस्सा है। इससे पहले उन्होंने अंगोला में द्विपक्षीय वार्ता की थी और वहां की संसद को संबोधित किया था।

भारत-बोत्सवाना संबंधों को नई मजबूती
राष्ट्रपति मुर्मू का यह दौरा भारत और बोत्सवाना के बीच हीरे, औषधि, प्रौद्योगिकी, कृषि, ऊर्जा और रक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर केंद्रित है। वर्तमान में दोनों देशों के बीच वार्षिक व्यापार 506 मिलियन अमेरिकी डॉलर का है।
- बोत्सवाना भारत को कच्चे हीरे निर्यात करता है,
- जबकि भारत वहां फार्मास्युटिकल्स, मशीनरी, इस्पात और विद्युत उपकरण भेजता है।
भारत और बोत्सवाना के बीच 1966 में राजनयिक संबंध स्थापित हुए थे, जो वर्ष 2026 में 60 वर्ष पूरे करेंगे। बोत्सवाना दुनिया में कीमत के लिहाज से सबसे बड़ा और मात्रा के अनुसार दूसरा सबसे बड़ा हीरा उत्पादक देश है।
‘प्रोजेक्ट चीता’ के तहत नया समझौता
इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच कई MoU पर हस्ताक्षर होंगे। एक प्रमुख समझौते के तहत कालाहारी रेगिस्तान से आठ चीतों को भारत भेजने की प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जाएगा।
इन चीतों को गाबोरोन से लगभग 10 किमी दूर मोकोलोदी नेचर रिज़र्व में रखा गया है, जहां राष्ट्रपति मुर्मू और राष्ट्रपति बोको एक प्रतीकात्मक क्वारंटीन समारोह में भाग लेंगे। यह पहल भारत के ‘प्रोजेक्ट चीता’ और दोनों देशों के वन्यजीव संरक्षण सहयोग का हिस्सा है।
राष्ट्रपति मुर्मू का कार्यक्रम
अपने तीन दिवसीय दौरे में राष्ट्रपति मुर्मू:
- राष्ट्रपति बोको के साथ प्रतिनिधि स्तर की वार्ता करेंगी,
- कई समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर करेंगी,
- बोत्सवाना की संसद को संबोधित करेंगी,
- और वहां बसे भारतीय समुदाय से भी मुलाकात करेंगी।
अंगोला दौरे की प्रमुख उपलब्धियां
बोत्सवाना से पहले, राष्ट्रपति मुर्मू ने अंगोला की यात्रा की थी, जहां उन्होंने राष्ट्रपति जाओ लॉरेंको के साथ द्विपक्षीय वार्ता की।
उन्होंने अंगोला की स्वतंत्रता की 50वीं वर्षगांठ समारोह में हिस्सा लिया और अंगोलन संसद को भी संबोधित किया।
भारत ने इस दौरान अंगोला को 200 मिलियन अमेरिकी डॉलर की ऋण सहायता (लाइन ऑफ क्रेडिट) दी, जो उसकी रक्षा क्षमताओं को बढ़ाने के लिए है। दोनों देशों ने रक्षा उपकरणों की खरीद, स्वास्थ्य, अंतरिक्ष तकनीक, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई।
अफ्रीका और ग्लोबल साउथ के साथ मजबूत साझेदारी
राष्ट्रपति मुर्मू की यह यात्रा भारत की अफ्रीका और ग्लोबल साउथ के साथ संबंधों को गहराने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। यह दौरा न केवल भारत-बोत्सवाना संबंधों में नया अध्याय जोड़ रहा है, बल्कि अफ्रीकी महाद्वीप में भारत की रणनीतिक उपस्थिति को भी सुदृढ़ कर रहा है।



