इंदौर। सोमवार को प्रदेश के काबीना मंत्री तुलसी सिलावट मीडिया के बीच कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर आरोप लगाने पहुंचे थे। वे राहुल गांधी पर आरोप लगा ही रहे थे कि इसी बीच किसी ने मंत्री जी पर ही लगे आरोप से जुड़ा सवाल पूछ लिया। फिर क्या था, मंत्रीजी ने एक-दो लाइन बोली और खुद को फंसता देख माइक बंद कर चलता हो गए।
दरअसल पत्रकारों ने कन्फेक्शनरी कारोबारी संजय जैसवानी से जुड़ा सवाल पूछ लिया। पत्रकारों ने पूछा कि मंत्रीजी जैसवानी को बचाने के आरोप आप पर लग रहे हैं। सवाल सुनकर मंत्रीजी तमतमा गए और कहा कि संविधान और कानून के अनुसार दोषियों पर कार्रवाई होगी। इससे पहले कि कोई कुछ और पूछता वे प्रेस कान्फ्रेंस छोड़कर भाग गए। यहां सवाल यह है कि अगर इन आरोपों में कोई सच्चाई नहीं है तो मंत्रीजी मीडिया का सामना क्यों नहीं कर पाए? अगर मंत्रीजी पर लगे आरोप झूठे हैं तो भी पूरी ताकत से जवाब दे सकते थे।
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मंत्रीजी का बेटा चिंटू रहा है जैसवानी का पार्टनर
पूरे शहर को कन्फेक्शनरी कारोबारी जैसवानी और तुलसी सिलावट के संबंधों की जानकारी है। सूत्र बताते हैं कि जैसवानी की एक कंपनी में मंत्रीजी का बेटा नितीश उर्फ चिंटू सिलावट डायरेक्टर रह चुका है। बाद में उसने इस्तीफा दे दिया था। इसी कंपनी में चिंटू के साथ मोस्ट वांटेड सटोरिया अमित सोनी भी डायरेक्टर रहा है। यह भी सबको पता है कि सिलावट के दो करीबी पुलिस थानों में जैसवानी के मामले निपटाते हैं। सब कुछ पानी की तरह साफ है। यही वजह है कि मंत्रीजी जैसवानी के मामले से बचने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उनका इस तरह प्रेस कान्फ्रेंस छोड़ जाना और भी कई सवाल खड़े कर रहा है।



