शेयर बाजार में गिरावट जारी रही, और 23 अक्टूबर 2026 को सेंसेक्स 125.56 अंक गिरकर 73,123.83 पर बंद हुआ। निफ्टी भी 87.65 अंक टूटकर 22,600 के नीचे आ गया। यह लगातार चौथा कारोबारी सत्र था जब बाजार लाल निशान में बंद हुआ।
सेंसेक्स और निफ्टी में कमजोरी बनी रही
सेंसेक्स ने 0.17 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की, जबकि निफ्टी में 0.39 प्रतिशत की कमी आई। निफ्टी 50 इंडेक्स 22,600 के नीचे बंद हुआ जो बाजार की कमजोरी को दर्शाता है। निवेशकों में बेचैनी देखी गई, खासकर मेटल और रियल्टी सेक्टर में।
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गिरावट के कारण और बाजार की प्रतिक्रिया
कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में उछाल, विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली और वैश्विक मंदी के संकेत बाजार दबाव के मुख्य कारण रहे। इसके अलावा, मध्य पूर्व में तनाव के चलते तेल की कीमतें बढ़ती रहीं, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ी। इस वजह से बाजार में बेचैनी और उतार-चढ़ाव बढ़ा।
सबसे ज्यादा नुकसान उठाने वाले और बढ़त वाले शेयर
श्रीराम फाइनेंस का शेयर निफ्टी 50 में सबसे ज्यादा 4 प्रतिशत गिरा। टाटा स्टील, जेएसडब्ल्यू स्टील, जियो फाइनेंशियल सर्विसेज और एडाणी पोर्ट्स में भी गिरावट रही। वहीं, एटरनल, अपोलो हॉस्पिटल्स, ओएनजीसी, एशियन पेंट्स, टीसीएस और इंफोसिस ने बढ़त बनाई।
सेक्टोरल सूचकांकों में गिरावट का असर
निफ्टी मेटल में 2.71 प्रतिशत और निफ्टी रियल्टी में 2.38 प्रतिशत की गिरावट के साथ बाजार का दबाव स्पष्ट दिखा। मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में क्रमशः 2.6 और लगभग 3 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई। यह संकेत देता है कि छोटे और मध्य आकार के कंपनियों के शेयरों में बिकवाली अधिक रही।
बाजार की गहराई और निवेशकों का रुख
NSE पर कुल 3,724 शेयरों में से 3,011 लाल निशान में बंद हुए जबकि केवल 624 शेयरों में तेजी रही। यह बाजार की व्यापक कमजोरी को दर्शाता है। निवेशक जोखिम कम करने की रणनीति अपना रहे हैं और उधार लेकर लिए गए पोजीशन कम कर रहे हैं।
आगे संभावित प्रभाव और बाजार की दिशा
विशेषज्ञों के अनुसार, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता बाजार पर दबाव बनाए रखेगी। महंगाई की दिशा और केंद्रीय बैंकों के कदम भी शेयर बाजार के रुख को प्रभावित करेंगे। निवेशकों को सावधानी बरतते हुए वैल्युएशन और कंपनियों की कमाई पर ध्यान देना होगा।



