इंदौर। इंदौर विकास प्राधिकरण (आईडीए) में एक संस्था को जमीन आवंटन के मामले में भारी गड़बड़ी सामने आई है। इसकी शिकायत लोकायुक्त में भी हुई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि एक संस्था को पहले ही अनुबंधित जमीन का आवंटन किए जाने के बावजूद ईश्वर नगर की जमीन के बदले योजना क्रमांक 113 और 136 में अतिरिक्त भूखंड आवंटित करने की प्रक्रिया की गई। शिकायत के बाद लोकायुक्त ने पत्र जारी कर जवाब मांगा है।
9 सितंबर को जारी हुआ पत्र
सूत्र बताते हैं कि लोकायुक्त की तरफ से 9 सितंबर 26 को इंदौर विकास प्राधिकरण के सीईओ के नाम पत्र जारी किया गया है। इसमें शिकायत के आधार पर बिन्दुवार जवाब मांगे गए हैं। आईडीए ऐसे किसी पत्र से इनकार करता रहा, लेकिन हकीकत में यह पत्र आईडीए के रिकॉर्ड में भी है।
👉 यह भी पढ़ें:
- कृष्णा संस्था के जमीन आवंटन में नियमों की उड़ी खुलेआम धज्जियां, जांच हो तो कई अफसरों तक पहुंचेगी आंच
- अपर आयुक्त के फर्जी आदेश मामले में दो बाबू और एक पटवारी की भूमिका, कार्रवाई की तैयारी
- आखिर यादव समाज के नाम पर जमीन का घोटाला करने वालों को क्यों बचाने में जुटी कांग्रेस
- जिस तृष्णा गृह निर्माण की जमीन पर तन गई कमर्शियल बिल्डिंग, उसका रजिस्ट्रेशन 2018 में ही निरस्त, गृह मंत्रालय के पत्र के बाद जांच में खुलासा
- जमीन के बदले नौकरी घोटाला: लालू यादव और परिवार को अदालत का समन
- गृह मंत्रालय के हस्तक्षेप के बाद तृष्णा गृह निर्माण संस्था में गड़बड़ी की जांच के आदेश, फर्जी तरीके से बेच दी जमीन, 15 दिन में मांगी रिपोर्ट
पत्र मिलने के बाद सीईओ चले गए छुट्टी
सूत्र बताते हैं कि लोकायुक्त में हुई शिकायत के बाद जब हंगामा मचा तो लीपापोती की कोशिश शुरू हुई। आईडीए सीईओ छुट्टी पर चले गए हैं, लेकिन यह पत्र और इससे संबंधित डॉक्यूमेंट उनकी ऑफिस में ही ताले में बंद हैं।
लोकायुक्त को भी बदनाम करने की कोशिश
इस पूरे मामले से आईडीए लगातार इनकार करता रहा। आईडीए के कुछ अफसरों द्वारा यह भी कहा गया कि लोकायुक्त में उनकी बात हो गई है और कोई पत्र जारी नहीं होने वाला। कुछ ने तो यह भी कहा कि पत्र बन गया है, लेकिन डिस्पैच नहीं होगा। अब कुछ अफसर कह रहे हैं कि लोकायुक्त ने जान कर डराने के लिए यह पत्र भेजा है।
संकल्प 09 प्रभारी और संस्था अध्यक्ष पर आरोप
प्राधिकरण के संकल्प 09 प्रभारी और संस्था के अध्यक्ष द्वारा मिलकर प्राधिकरण को 40 करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान पहुंचाये जाने का कार्य किया गया है। उक्त संस्था के अध्यक्ष पर पूर्व में तत्कालीन कलेक्टर मनीष सिंह द्वारा सोसायटी के मामलों में 420 एवं भ्रष्टाचार की धाराओं में 04 महीने की सजा हो चुकी है। प्रकरण में संकल्प 09 प्रभारी के साथ संबंधित लिपिक, जिसने वर्ष 2005 के बाद भी प्राधिकरण के 27 भूखण्ड इस योजना में रिक्त पड़े थे, जो कि उनकी जानकारी में था, फिर भी उन्होंने यह जानकारी सम्पदा अधिकारी को नहीं दी, जबकि उक्त रिक्त भूखण्ड प्राधिकरण भेजकर करोड़ो रुपये कमा सकता था। प्राधिकरण की नियोजन शाखा में इस कृत्य की दोषी है, जिन्होनें उक्त योजना के संबंध में संस्था को समस्त भूखंड देने के बाद भी प्राधिकरण को धोखे में रखा। वर्तमान मुख्य कार्यपालन अधिकारी महोदय को भी धोखे में रखा गया है, जो उनके संज्ञान में नहीं था।
लोकायुक्त ने आईडीए से पूछे हैं ये सवाल
1. संकल्प क्रमांक 09 दिनांक 31.01.1986 एवं संकल्प क्रमांक 93 दिनांक 14.05.1993 का शिकायतकर्ता ने लेख किया है। उपरोक्त दोनों संकल्पों के आदेश की प्रति एवं वस्तुस्थिति।
2. संकल्प क्रमांक 232 दिनांक 08.10.1993 से लागू किये जाने का लेख किया गया है तथा संकल्प क्रमांक 232 के यथा संशोधित संकल्प क्रमांक 83 दिनांक 15.02.2005 प्राधिकारी बोर्ड द्वारा गठित किया गया है। इस संबंध में भी आदेशों की प्रतियां एवं वस्तुस्थिति।
3. प्राधिकरण बोर्ड द्वारा लिये निर्णय अनुसार संकल्प क्रमांक 232 दिनांक 08.10.1993 में उल्लेखित समस्त योजनाओं के संबंध में यह परीक्षण किये जाने का प्रावधान है कि इन योजनाओं में 50 प्रतिशत आवासीय विकसित दुकान प्राप्त हो रही है अथवा नहीं। योजना में विकास कार्य उपरांत प्राप्त होने वाले कुल विकसित आवासीय भूखण्डों का प्रतिशत 50 प्रतिशत से कम है, ऐसी योजनाओं में संकल्प क्रमांक 232 के अनुबंधित संस्थाओं को 50 प्रतिशत आवासीय विकसित भूखण्ड न दिये जाकर वास्तव में प्राप्त होने वाले आवासीय विकसित भूखण्ड के प्रतिशत के मान से ही सामान्य श्रेणी के आवासीय विकसित भूखण्ड दिये जावे। इस संबंध में वस्तुस्थिति से अवगत करावे।
4. योजना क्रमांक 113 कबीटखेड़ी प्राधिकारी की भू-अर्जित भूमि होकर विज्ञप्ति क्रमांक 594 दिनांक 29.04.1986 के द्वारा म.प्र. नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम, 1874 की धारा 50 की उपधारा 4 के अधीन प्राधिकारी द्वारा अनुमोदित ग्राम कबीटखेड़ी की भूमि से संबंधित धारा 50(7) द्वारा घोषित योजना है। उक्त योजना प्राधिकारी की भू-अर्जित योजना है। उक्त भूमि का भू-अर्जन/अवार्ड दिनांक 05.05.1990 को पारित किया जा चुका है एवं प्राधिकारी की योजना में प्राप्त कुल भूमि 8.496 हेक्टेयर का प्राधिकारी द्वारा भू-अर्जन कर पत्र क्रमांक 6495 दिनांक 05.11.2001 एवं अन्य पत्रों द्वारा भू-अर्जन की एवं मुआवजा की राशि रुपये 10,36,593/-रुपये चेक के माध्यम से अपर कलेक्टर एवं भू-अर्जन अधिकारी के कार्यालय में जमा की गई है। प्राधिकारी द्वारा जारी पत्र क्रमांक 3855 दिनांक 16.07.2003 का अवलोकन करे, जिसमें संस्था की सहमति दी गई है। इसके साथ ही संस्था एवं प्राधिकारी के अनुबंध का भी अवलोकन करे, जिसमें चरण क्रमांक 02 में उल्लेखित भूमि अर्थात ईश्वर नगर की 02 एकड़ भूमि जो प्राधिकारी की योजना क्रमांक 113 में शामिल है, को शासन आदेश द्वारा योजना में ही रखे जाने एवं अन्य शेष भूमि को कृष्णा गृह निर्माण सहकारी संस्था को अनुबंध अनुसार विकसित कर संस्था को देने का समझौता एवं माननीय उच्च न्यायालय में दर्ज विविध याचिका क्रमांक 1172/1989 को संस्था द्वारा वापस लेकर एक समझौता पत्र प्राधिकारी के पक्ष में किया गया था, जिसमें समझौता अनुसार वर्तमान में एवं भविष्य में भी संस्था का कोई भी सदस्य ईश्वर नगर की 02 एकड़ भूमि की मांग नहीं करेगा। समझौता पत्र भू-अर्जन शाखा की नस्ती में होने का लेख किया है। ईश्वर नगर के विस्थापितों के संबंध में संस्था द्वारा एक इकरार नामा दिनांक 12.10.2000 को प्राधिकरण के और संस्था के मध्य निष्पादित किया गया था, जिसमें भविष्य में ईश्वर नगर की भूमि के बदले कोई भी सदस्य भूखण्ड की मांग नहीं करेगा। अनुबंध के साथ संस्था का मौका पंचनामा एवं कब्जा रसीद भी आवेदक ने प्रस्तुत किया है। प्राधिकरण द्वारा पत्र क्रमांक 6534 दिनांक 19.10.2000 द्वारा उक्त संस्था को कुल आवंटन योग्य 36108 वर्गमीटर क्षेत्रफल के भूखंड आरक्षित किये गये है, जिसमें प्राधिकरण द्वारा भूमि मुआवजा राशि कुल 8.496 हेक्टेयर के स्थान पर संस्था से प्राप्त 7.673 हेक्टेयर भूमि का मुआवजा ही संस्था से प्राधिकरण द्वारा लिया गया है, जबकि प्राधिकरण द्वारा कुल 8. 496 हेक्टेयर भूमि का मुआवजा कलेक्टर कार्यालय में जमा किया है। इस संबंध में दस्तावेज सहित वस्तुस्थिति का विवरण।
5. प्राधिकरण द्वारा पत्र क्रमांक 6534 दिनांक 19.12.2000 के माध्यम से उक्त संस्था को अनुबंधित कुल रकबा 7.673 हेक्टेयर के संबंध में जारी किया है, जिसमें संस्था को उसमें अनुबंध भूमि का कुल 36450 वर्गमीटर क्षेत्रफल निर्धारित किया जाकर प्रीमियम 120/- रुपये प्रति वर्गफीट निर्धारित की गई है। उक्त भूमि प्राधिकरण द्वारा भू-अर्जित भूमि होकर उक्त भूमि पर प्राधिकरण का नाम भी दर्ज है। प्राधिकरण द्वारा संस्था को कुल अनुबंधित 7.673 हेक्टेयर भूमि का आवंटन वर्ष 2005 में ही कर दिया गया था, परन्तु 20 वर्ष पश्चात् संस्था के नये अध्यक्ष द्वारा ईश्वर नगर की अनुबंध भूमि के संबंध में समझौता करने के बाद भी प्राधिकरण को धोखे में रखा जाकर पुनः मांग की गई है एवं प्राधिकरण के संकल्प प्रभारी एवं भू-अर्जन अधिकारी द्वारा बिना जांच प्रतिवेदन अपने पद का गलत दुरुपयोग कर एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी द्वारा पद का दुरुपयोग कर संस्था के पक्ष में पत्र जारी किया है, जो घोर लापरवाही पूर्ण होकर संकल्प के प्रावधान के अनुसार गलत है एवं भ्रष्टाचार का प्रतीक है। इस संबंध में दस्तावेज सहित वस्तुस्थिति का विवरण।
6. संस्था को करोडो रुपये की भूमि देने के संबंध में प्राधिकरण द्वारा कोई बैठक नहीं की गई और ना ही कोई अनुशंसा की गई। मुख्य कार्यपालन अधिकारी द्वारा पत्र जारी नहीं किया गया। संकल्प प्रभारी 09 द्वारा अपने पत्र में “अध्यक्ष महोदय द्वारा अनुमोदित” शब्द का प्रयोग किया है, जबकि वास्तविकता में अध्यक्ष कमिश्नर इंदौर तथा सदस्य कलेक्टर इंदौर एवं विभाग के अन्य पदाधिकारी प्राधिकरण बोर्ड के सदस्य है। इन सभी को बोर्ड बैठक में प्राप्त एजेंडों को स्वीकृत करने या ना करने की शक्ति प्राप्त है, किन्तु अकेले प्राधिकरण अध्यक्ष द्वारा किसी आर्थिक मामले में अपनी व्यक्तिगत अनुशंसा को प्राधिकरण बोर्ड स्वीकार नहीं करता है। यहां भी संकल्प 09 प्रभारी द्वारा गलत आदेश जारी किया है। तत्कालीन प्राधिकरण अध्यक्ष द्वारा भू-अर्जन/संकल्प 09 प्रभारी को अपने कार्य में लापरवाही एवं उदासीनता तथा भ्रष्टाचार का दोषी पाया है और विभागीय जांच आदेशित की है।



